Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: सरकारी नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये, मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक लेने के आरोप में झारखंड पुलिस के एक हवलदार को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान सुशील कुमार के रूप में हुई है, जो आईआरबी-03, पिपरवार (चतरा) में हवलदार के पद पर तैनात था। चौका थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सुनियोजित ठगी का प्रतीत हो रहा है। हालांकि अब तक की जांच में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) या उसके किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शिकायत के बाद खुला मामला

इस मामले का खुलासा चौका थाना क्षेत्र निवासी गुरु चरण साव की लिखित शिकायत के बाद हुआ। शिकायत में बताया गया कि एक व्यक्ति स्वयं को जेएसएससी की पीजीटी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ बताकर उनकी भांजी की सरकारी नौकरी सुनिश्चित कराने का दावा कर रहा था। इसके बदले वह मोटी रकम की मांग कर रहा था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने भरोसा दिलाया कि उसके प्रभाव और संपर्कों के कारण भर्ती प्रक्रिया में नौकरी दिलाई जा सकती है। उसने कथित तौर पर पैसे के अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मांगे।

लाखों रुपये और मूल दस्तावेज लेने का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपी पर बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूलने का आरोप है। इतना ही नहीं, उसने कथित रूप से अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक भी अपने पास जमा कराए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से इस तरह ठगी की और कुल कितनी राशि वसूली गई।

जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। इसलिए पुलिस सभी संभावित पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील कर रही है।

ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा

गुरु चरण साव को जब आरोपी की गतिविधियों पर संदेह हुआ तो उन्होंने स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची चौका थाना पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर थाने लाई, जहां उससे पूछताछ की गई।

पूछताछ और शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

JSSC का नाम इस्तेमाल करने का आरोप

पुलिस का कहना है कि आरोपी खुद को जेएसएससी की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ बताकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करता था। हालांकि प्रारंभिक जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि जेएसएससी या उसके किसी अधिकारी की इस कथित ठगी में कोई भूमिका रही हो।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि अब तक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह एक व्यक्तिगत स्तर पर की गई कथित धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

दस्तावेज और लेन-देन की जांच

जांच एजेंसी आरोपी के कब्जे से बरामद दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों से संपर्क किया, कितनी राशि ली और क्या उसने किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर इस कथित ठगी को अंजाम दिया।

आवश्यक होने पर पुलिस आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच करेगी ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पुलिस की अपील

पुलिस ने युवाओं और अभिभावकों से अपील की है कि वे सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति के बहकावे में न आएं। सरकारी भर्ती प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती हैं। किसी भी भर्ती में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे या दस्तावेज मांगने वाले व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को दें।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं को केवल आधिकारिक वेबसाइटों और विभागीय सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए। किसी भी दलाल, बिचौलिए या प्रभाव का दावा करने वाले व्यक्ति से सावधान रहना आवश्यक है।

फिलहाल चौका थाना पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने इस कथित ठगी के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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