चेन्नई: स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य भर के सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे वेंडिंग मशीनों के जरिए मुफ्त बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल (खाद में बदलने योग्य) सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं और 'मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन' (MHM) के लिए अलग से जगह (कॉर्नर) बनाएं।

ये दिशानिर्देश 'डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत संघ व अन्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और 'राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता नीति' के अनुरूप जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी के कारण किशोर छात्राएं अपनी कक्षाएं न छोड़ें।

इस आदेश के तहत, स्कूलों को लड़कियों के शौचालयों में वेंडिंग मशीनें लगानी होंगी, जिनसे मुफ्त और सुरक्षित सैनिटरी पैड मिल सकें। जहां स्वचालित मशीनें नहीं लगाई जा सकतीं, वहां स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पैड बिना किसी रुकावट और बिना किसी झिझक या शर्मिंदगी के छात्राओं तक पहुंचें।

इस निर्देश में बिना किसी बाधा वाले बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर जोर दिया गया है। स्कूलों को ऐसे शौचालय बनाए रखने होंगे जो हमेशा चालू हालत में हों, लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग हों, और जिनमें पानी, साबुन और हाथ धोने की उचित व्यवस्था हो।

शौचालयों (चाहे वे पहले से बने हों या नए बनाए जा रहे हों) में पूरी गोपनीयता होनी चाहिए और वे विशेष जरूरतों वाले बच्चों (CwSN) के लिए भी पूरी तरह सुलभ होने चाहिए। हर शौचालय के स्टॉल में ढक्कन वाला डस्टबिन होना चाहिए, और कचरे का निपटान 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों' (Solid Waste Management Rules) के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

 

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