चेन्नई। तमिलनाडु में आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और कावेरी नदी के जल प्रबंधन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर महंगाई नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चावल, चीनी, इमली और दालों जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने कावेरी जल प्रबंधन में कथित लापरवाही के कारण किसानों की परेशानी बढ़ने और आने वाले महीनों में पेयजल संकट पैदा होने की आशंका जताई।सलेम से तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे पलानीस्वामी ने चेन्नई रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने तमिलनाडु सरकार की आर्थिक और कृषि संबंधी नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
जरूरी वस्तुओं की कीमतों में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा
पलानीस्वामी ने कहा कि तमिलनाडु में खाद्य पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि चावल की कीमत कुछ श्रेणियों में 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि चीनी की कीमत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।उन्होंने इमली और दालों सहित किराने की अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ने का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से आम परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है।हालांकि, कीमतों में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी का आंकड़ा पलानीस्वामी का दावा है और इसे सभी आवश्यक वस्तुओं की आधिकारिक औसत महंगाई दर नहीं माना जा सकता।
सरकार पर ठोस कदम नहीं उठाने का आरोप
AIADMK महासचिव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों के मंत्री भी कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को बढ़ती कीमतों के मद्देनजर रियायती दर पर चावल उपलब्ध कराने की घोषणा की है। सरकार के अनुसार, चुनिंदा किस्म का चावल अमुधम विभागीय भंडारों और सहकारी दुकानों के माध्यम से 30 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचा जाएगा।
कावेरी जल प्रबंधन पर भी उठाए सवाल
महंगाई के अलावा पलानीस्वामी ने कावेरी नदी के पानी के प्रबंधन को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि उचित योजना के अभाव में कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे धान की खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।पलानीस्वामी ने कहा कि सांबा धान की खेती के लिए लंबे समय तक पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में जल आपूर्ति की सही योजना नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।
मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सांबा धान की खेती के लिए मेट्टूर बांध से 45 दिनों तक पानी छोड़ने की घोषणा की गई थी। लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पानी की आपूर्ति रोक दिए जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।उन्होंने सवाल किया कि जब धान की फसल को जनवरी तक सिंचाई की आवश्यकता होती है, तो सरकार ने आगे की जल आपूर्ति के लिए क्या व्यवस्था की है।कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पानी की कमी को लेकर किसानों ने भी हाल में विरोध-प्रदर्शन किए हैं। सिंचाई जल की कमी से फसलों के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
आने वाले महीनों में पेयजल संकट की आशंका
पलानीस्वामी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल प्रबंधन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले महीनों में राज्य के कुछ इलाकों में पेयजल की किल्लत हो सकती है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कृषि और जल आपूर्ति की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी योजना का अभाव है।
किसानों और आम जनता के मुद्दों पर बढ़ी राजनीति
महंगाई और कावेरी जल प्रबंधन को लेकर पलानीस्वामी के आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।एक ओर विपक्ष सरकार से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित करने और किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, सरकार ने चावल की कीमतों से राहत देने के लिए रियायती बिक्री की घोषणा की है।फिलहाल, बढ़ती कीमतों और जल संकट की आशंका के बीच सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर किसानों और उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।