परिसीमन पर विजय थलपति की बैठक का बहिष्कार 37 सांसदों ने बनाई दूरी

Update: 2026-08-08 09:06 GMT
चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को परिसीमन के मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक से राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों डीएमके और एआईएडीएमके समेत कई पार्टियों ने दूरी बना ली। कुल 57 सांसदों वाले तमिलनाडु में 37 सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने की खबर है, जबकि 20 सांसदों के इसमें शामिल होने की उम्मीद जताई गई। बैठक का आयोजन शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई में किया गया। ([The New Indian Express][1])
बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में कांग्रेस के 12, वीसीके के 2, सीपीआई के 2, सीपीआईएम के 2, एमडीएमके का 1 और आईयूएमएल का 1 सांसद शामिल बताया गया है। दूसरी ओर डीएमके के सभी 30 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाई। एआईएडीएमके के चार सांसदों के अलावा पीएमके, एमएनएम और डीएमडीके के एक-एक सांसद ने भी बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। इस तरह मुख्यमंत्री विजय की पहल को राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की ओर से अपेक्षित व्यापक समर्थन नहीं मिल सका।
मुख्यमंत्री विजय ने यह बैठक परिसीमन की संभावित प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु के हितों और राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा के लिए बुलाई है। दक्षिण भारतीय राज्यों में इस बात को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन के बाद संसद में कुछ राज्यों की सीटों का अनुपात प्रभावित हो सकता है। इसी मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर चिंता जाहिर करते रहे हैं।
बैठक के बहिष्कार को लेकर डीएमके की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी सांसद कनिमोझी ने बैठक को अनावश्यक बताया। उनका तर्क है कि जब केंद्र सरकार की ओर से मौजूदा संसद सत्र में परिसीमन से संबंधित किसी नए विधेयक को पेश करने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, तो इस स्तर पर बैठक बुलाने की जरूरत क्या है। डीएमके का कहना है कि पार्टी परिसीमन के मुद्दे पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी है और राज्य के हितों से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
डीएमके की ओर से यह भी कहा गया कि पार्टी फिलहाल कावेरी नदी से जुड़े मेकेदातू विवाद को अधिक अहम मानती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जब सरकार मेकेदातू मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी, तब डीएमके उसमें चर्चा के लिए शामिल होगी। इस रुख से साफ है कि परिसीमन को लेकर मुख्यमंत्री विजय और डीएमके के बीच राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की बैठक का समर्थन किया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि जो लोग राजनीतिक हितों को तमिलनाडु के हितों से ऊपर रखते हैं, वे बैठक से दूरी बना सकते हैं, लेकिन राज्य के अधिकारों, हितों और भविष्य को प्राथमिकता देने वाले नेताओं को बैठक में शामिल होना चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन केवल किसी एक पार्टी का राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध तमिलनाडु के भविष्य के संसदीय प्रतिनिधित्व से है।
मुख्यमंत्री विजय की बैठक ऐसे समय हुई है, जब राज्य की राजनीति में परिसीमन को लेकर अलग-अलग दलों के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। अब डीएमके और एआईएडीएमके के बहिष्कार के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री की पहल से राज्य के लिए कोई साझा राजनीतिक रुख तैयार हो पाएगा।
परिसीमन का मुद्दा तमिलनाडु के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण, विकास और संसदीय प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन की बात करता रहा है। दक्षिण भारत के कई राज्यों को आशंका है कि यदि भविष्य में सीटों का पुनर्विन्यास मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर हुआ तो कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान हो सकता है। इसी वजह से इस मुद्दे पर तमिलनाडु में राजनीतिक बहस लगातार तेज रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस समेत कुछ सहयोगी दलों का मुख्यमंत्री विजय की बैठक में शामिल होना एक अलग राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि डीएमके और एआईएडीएमके का बहिष्कार मुख्यमंत्री के लिए चुनौती है। बैठक में शामिल होने वाले सांसद अब परिसीमन के संभावित प्रभाव, तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व और राज्य के हितों को लेकर अपना पक्ष रखेंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 सांसदों की मौजूदगी वाली यह बैठक तमिलनाडु के लिए किसी साझा प्रस्ताव या राजनीतिक सहमति का आधार बन पाती है या नहीं। दूसरी ओर 37 सांसदों का दूरी बनाना यह संकेत देता है कि परिसीमन के मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक दलों के बीच अभी व्यापक सहमति बनना बाकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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