मेट्टूर थर्मल पावर प्लांट के पास फ्लाई ऐश के घोल से खेतों में पानी भर गया
सलेम: मेट्टूर थर्मल पावर स्टेशन से निकली फ्लाई ऐश स्लरी (राख और पानी का मिश्रण) प्लांट के पीछे मौजूद खेतों में फैल गई है। इससे लगभग 10 एकड़ ज़मीन जलमग्न हो गई है और मक्का, प्याज़ व कपास जैसी फ़सलें बर्बाद हो गई हैं। इलाके के लोगों और किसानों ने अधिकारियों से अपील की है कि वे तुरंत प्रभावित खेतों का मुआयना करें और राख को और फैलने से रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाएं।
मेट्टूर थर्मल पावर स्टेशन में दो प्लांट हैं — MTPS-I, जिसमें 210 MW क्षमता वाली चार जनरेटिंग यूनिट हैं, और MTPS-II, जिसमें 600 MW क्षमता वाली एक जनरेटिंग यूनिट है। इन दोनों प्लांट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 1,440 MW है।
दोनों प्लांट कोयला जलाकर बिजली बनाते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में राख (बाय-प्रोडक्ट के तौर पर) निकलती है। स्टेशन पर निकलने वाली राख को मुख्य रूप से दो तरह से संभाला जाता है: सूखी फ्लाई ऐश और गीली राख।
फ्लाई ऐश का कुछ हिस्सा सीमेंट फ़ैक्टरियों और दूसरे उद्योगों को इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है। बाकी बची राख को पानी में मिलाकर तय ऐश पॉन्ड (राख जमा करने वाले तालाब) में रखा जाता है, क्योंकि सूखी फ्लाई ऐश को खुले में नहीं रखा जा सकता; हवा से इसके उड़कर फैलने का डर रहता है।