मदुरै: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मंगलवार को कहा कि सिर्फ़ कॉल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन के आधार पर आपराधिक मिलीभगत का आरोप साबित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने तिरुनेलवेली में 27 जुलाई, 2025 को टेक कर्मचारी एम. कविन सेल्वागणेश की कथित ऑनर किलिंग के मामले में CB-CID द्वारा सब-इंस्पेक्टर के. सरवनन और उनकी पत्नी कृष्णकुमारी के खिलाफ़ दायर चार्जशीट को रद्द कर दिया। कोर्ट ने मामले में आगे की जांच का आदेश देने से भी इनकार कर दिया।
CB-CID का आरोप था कि यह सनसनीखेज हत्या, SC समुदाय के युवक सेल्वागणेश और SI दंपत्ति (जो एक प्रभावशाली पिछड़ी जाति से थे) की बेटी के बीच अंतर-जातीय रिश्ते का नतीजा थी। जस्टिस आर. विजयकुमार ने दंपत्ति द्वारा दायर दो याचिकाओं पर अलग-अलग आदेश पारित किए।
जस्टिस आर. विजयकुमार ने कहा कि हालांकि CB-CID ने चार्जशीट में दावा किया था कि सरवनन और कृष्णकुमारी कथित हत्या के तुरंत बाद अपने बेटे सुरजीत (मुख्य आरोपी) से मिले थे और उसके कपड़े व अन्य सबूत नष्ट करने में मदद की थी, लेकिन इस मुलाकात का कोई चश्मदीद गवाह, CCTV फुटेज, तस्वीर, वीडियो रिकॉर्डिंग या किसी स्वतंत्र गवाह का बयान नहीं था।
जज ने कहा कि इस मुलाकात को केवल इस आधार पर साबित करने की कोशिश की गई कि उस दौरान तीनों के मोबाइल फोन एक ही सेल टावर से जुड़े थे। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए जज ने कहा कि टावर लोकेशन से यह पक्के तौर पर साबित नहीं हो सकता कि दो लोग एक-दूसरे के साथ थे; यह केवल पुष्टि करने के लिए सीमित सबूत के तौर पर काम आ सकता है। इसी तरह, कॉल रिकॉर्ड से केवल बातचीत होने का पता चलता है, न कि बातचीत में क्या कहा गया, इसका। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए, जोड़े ने अपने बेटे को जो निर्देश दिए थे, वे केवल CB-CID द्वारा निकाले गए निष्कर्ष हैं।