CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से TVK ने बनाई दूरी, कांग्रेस से फिर उभरे मतभेद
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ तमिळगा वेत्री कड़गम (TVK) और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच एक बार फिर मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आक्रामक है, वहीं मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK ने इस मांग से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी का कहना है कि केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करना समस्या का समाधान नहीं है और इससे मूल मुद्दे से ध्यान भटक सकता है।
TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने इस मुद्दे पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति को हटाने भर से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। उनका कहना था कि पार्टी ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करेगी जिसे वह मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने वाला मानती है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि TVK मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों पर कायम है।
राजमोहन ने कहा कि TVK अध्यक्ष विजय चुनाव से पहले भी SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और आवश्यक बदलाव की मांग कर चुके हैं। पार्टी का आरोप रहा है कि मतदाता सूची से कुछ नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े किए। TVK ने साफ किया है कि वह इस विषय पर अपनी आपत्ति जारी रखेगी, लेकिन इसे सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जोड़ना जरूरी नहीं मानती।
यह रुख कांग्रेस की लाइन से अलग है। कांग्रेस ने देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज किया है। कांग्रेस कार्यसमिति की हालिया बैठक में पार्टी ने SIR प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों की बहाली की मांग के साथ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों का विरोध किया है और कहा है कि उसकी प्रक्रियाएं कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोला है। विपक्षी दलों के एक हिस्से ने SIR को रोकने के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी DMK के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन भी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर चुके हैं।
ऐसे माहौल में TVK का अलग रुख तमिलनाडु की गठबंधन राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। विजय के नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस साझेदार है, लेकिन दोनों दल पहले भी कई मुद्दों पर अलग-अलग सार्वजनिक राय जाहिर कर चुके हैं। CEC के इस्तीफे के सवाल पर यह मतभेद एक बार फिर सामने आया है।
TVK ने फिलहाल यह संकेत दिया है कि वह चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक लाइन बनाए रखना चाहती है। पार्टी का कहना है कि चुनाव व्यवस्था में सुधार, मतदाता सूची में पारदर्शिता और लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने जैसी शिकायतों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
दूसरी ओर कांग्रेस इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक अभियान में बदल चुकी है। पार्टी ने देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए हैं और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ये आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर हैं, लेकिन इन पर अंतिम संस्थागत या न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन से जुड़े फैसले तय प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं। आयोग ने अपने भीतर मतभेद या एकतरफा निर्णय से जुड़े आरोपों को भी खारिज किया है। इस विषय से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है, जहां चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की तैयारी है।
तमिलनाडु में TVK और कांग्रेस के बीच यह पहला सार्वजनिक मतभेद नहीं है। इससे पहले भी कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर दोनों दलों के नेताओं के बयान अलग-अलग रहे हैं। इसके बावजूद दोनों दल राज्य की सरकार में साथ हैं। इसलिए मौजूदा विवाद को गठबंधन टूटने के संकेत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
TVK के लिए यह मुद्दा राजनीतिक संतुलन का भी है। एक ओर वह SIR प्रक्रिया का विरोध जारी रखना चाहती है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की हर मांग से खुद को स्वतः नहीं जोड़ना चाहती। पार्टी का यह रुख उसकी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि TVK ने इसे किसी व्यापक गठबंधन विवाद के रूप में पेश नहीं किया है।
कांग्रेस के लिए CEC का इस्तीफा एक केंद्रीय मांग बन चुका है। वहीं TVK का कहना है कि किसी व्यक्ति को हटाने से अधिक महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया में संस्थागत सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह मतभेद इसलिए भी अहम है क्योंकि विजय की सरकार कांग्रेस के समर्थन और गठबंधन पर निर्भर है। ऐसे में दोनों दलों के बीच प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग रुख भविष्य में भी राजनीतिक बहस का कारण बन सकता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि SIR के मुद्दे पर TVK और कांग्रेस दोनों चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन समाधान के तरीके पर दोनों की राय अलग है। कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कायम है, जबकि TVK ने इस मांग को समर्थन देने से इनकार करते हुए अपना ध्यान SIR और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव पर केंद्रित रखा है।