औद्योगिक कचरे के निपटान और जल प्रदूषण पर सिक्किम हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
गंगटोक: सिक्किम उच्च न्यायालय ने राज्य भर की दवा कंपनियों और अन्य उद्योगों के कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) सिस्टम की जांच करने और नदियों व झरनों में कचरा बहाने से रोकने का आदेश दिया है।
अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को यह जांचने का भी निर्देश दिया है कि क्या होटलों के पास काम करने के लिए जरूरी अनुमति है और क्या वे प्रदूषण नियंत्रण की शर्तों का पालन कर रहे हैं। ये निर्देश 28 अक्टूबर को एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिए गए।
मुख्य न्यायाधीश ए. मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ने कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) के साथ मिलकर सभी जिलों में दवा कंपनियों और अन्य उद्योगों का संयुक्त निरीक्षण करना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा, "इन निरीक्षणों के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कचरा प्रबंधन सिस्टम कितने प्रभावी हैं। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि क्या उद्योगों, होटलों या अन्य प्रतिष्ठानों से कोई कचरा या अपशिष्ट पदार्थ स्थानीय नदियों, जल धाराओं और झरनों में तो नहीं बहाया जा रहा है। इसके अलावा, SPCB यह भी सुनिश्चित करेगा कि सभी होटलों के पास जरूरी अनुमति है और वे उसमें दी गई शर्तों का सख्ती से पालन कर रहे हैं।"
सिक्किम में कई दवा निर्माण इकाइयां हैं, जिनमें से कुछ राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में नदियों के करीब स्थित हैं। इस निरीक्षण अभियान के दौरान वहां कचरा प्रबंधन की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन की जांच की जाएगी।
जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान, मंगन जिला प्रशासन ने सिक्किम उच्च न्यायालय को बताया कि लाचेन और लाचुंग में निरीक्षण किया गया है। साथ ही, वहां के घरों और होटलों के मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नदियों, झरनों और जल धाराओं में कचरा न बहाएं।
SPCB के अधीक्षक अभियंता (सुपरिटेंडेंट इंजीनियर) ने अदालत को बताया कि जिन होटलों के पास SPCB की अनुमति नहीं है, उन्हें यह अनुमति लेने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय दिया गया है।
सिक्किम उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि 31 मार्च 2027 के बाद भी किसी होटल के पास SPCB की अनुमति नहीं होती है, तो SPCB ऐसे होटलों को बंद करने के लिए तुरंत कार्रवाई करेगा। एक स्वतः संज्ञान (suo moto) जनहित याचिका (PIL) की पिछली सुनवाई के दौरान, सिक्किम उच्च न्यायालय ने लाचुंग और लाचेन में अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं के निरीक्षण का निर्देश दिया था। इसके बाद, मंगन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी। 14 अक्टूबर को हुई जनहित याचिका की अगली सुनवाई में, इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को "चिंताजनक" बताया गया।
रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सेप्टिक टैंकों और घरों से निकलने वाला अपशिष्ट जल (wastewater) स्थानीय जल धाराओं में बहाया जा रहा है। ये धाराएं अंततः लाचेन चू और लाचुंग चू में जाकर मिलती हैं, जो तीस्ता नदी की दो मुख्य सहायक नदियां हैं।
सिक्किम उच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के बाद—जिनमें नदियों और जल धाराओं में बिना उपचारित (untreated) सीवेज के बहाव को रोकने के लिए कहा गया था—मंगन जिले के अधिकारियों ने लाचेन और लाचुंग में सीवेज डिस्चार्ज पॉइंट्स का निरीक्षण किया, ताकि अपशिष्ट जल के निपटान के लिए समाधान तलाशे जा सकें।
24 अक्टूबर को, मंगन जिला कलेक्टर अनंत जैन के नेतृत्व में एक संयुक्त निरीक्षण किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी और लाचेन तथा लाचुंग के 'पिपोन' (स्थानीय प्रमुख) भी मौजूद थे। टीम ने सीवेज निपटान की मौजूदा व्यवस्थाओं की जांच की और जहां भी संभव हो, सोक पिट (soak pits) और सेप्टिक टैंक जैसे उपायों पर विचार किया।
लाचेन और लाचुंग उत्तरी सिक्किम के दो प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जहां पर्यटन के पीक सीजन के दौरान हर दिन लगभग 4,000 पर्यटक आते हैं।