पाक्योंग: गुरुवार को पाक्योंग जिले के पास्टिंग, लिंगतम में 'ल्हाली कुमो' (Lhali Kumo) नामक एक गुरुंग हथकरघा और वस्त्र केंद्र का उद्घाटन किया गया। भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सद्भावना' के तहत स्थापित इस केंद्र का उद्देश्य पारंपरिक बुनाई कौशल को संरक्षित करना और ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका को बढ़ावा देना है।
क्षेत्र के विधायक और मंत्री पूरन गुरुंग ने वाणिज्य और उद्योग विभाग की अध्यक्ष निम चिक्की शेरपा, सहकारिता विभाग की अध्यक्ष विद्या विश्वकर्मा, 5/9 जीआर (फिल्लोरा) के कर्नल बसु भोज, मेजर हर्ष मिश्रा, नायब सूबेदार नवराज बस्नेत, पंचायत अध्यक्ष अरुण गुरुंग, एसडीएम रोंगली और अन्य स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में इस केंद्र का उद्घाटन किया।
मुख्य अतिथि पूरन गुरुंग ने सभा को संबोधित करते हुए 'ल्हाली कुमो' के सदस्यों को बधाई दी। यह महिलाओं का एक स्वयं-सहायता समूह है, जिसकी अध्यक्ष नार माया गुरुंग और सचिव पासांग ल्हामू तमांग हैं, और इसमें 16 अन्य सदस्य भी शामिल हैं। उन्होंने केंद्र के विकास के लिए समूह को आर्थिक सहायता प्रदान की और सदस्यों से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करने तथा अपने पारंपरिक कौशल को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का आग्रह किया।
पास्टिंग-लिंगतम के निवासियों को संबोधित करते हुए, मंत्री ने उन्हें सड़क संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार करने और जरूरतमंद ग्रामीणों तक सरकारी लाभ पहुँचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत हितों के बजाय जनहित से जुड़ी मांगों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
कर्नल बसु भोज ने अपने संबोधन में कहा कि यह परियोजना महिला समूह को उनके कौशल को मजबूत करने और आय के अवसर बढ़ाने के लिए दी गई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों के पास मूल्यवान पारंपरिक कौशल तो हैं, लेकिन अक्सर उनके पास ऐसे साधन नहीं होते जिनसे वे इसे आजीविका के स्थायी स्रोत में बदल सकें।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र महिलाओं को अपने कौशल को आर्थिक लाभ में बदलने का अवसर देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहाँ के पारंपरिक वस्त्र और उत्पाद देश और विदेश में पहचान बनाएंगे।
इस अवसर पर, केंद्र की स्थापना में योगदान देने वाले आठ लोगों को प्रशस्ति पत्र और पारंपरिक शॉल देकर सम्मानित किया गया। पास्टिंग गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल के छात्रों ने कविताएं सुनाईं, जबकि गांव की महिलाओं ने पारंपरिक गुरुंग, शेरपा और तमांग नृत्य प्रस्तुत किए।
इससे पहले, सिक्किम सरकार के बिजली विभाग में अकाउंट ऑफिसर और आयोजन समिति के सदस्य, एन.बी. गुरुंग ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल 'ल्हाली कुमो' महिला समूह के सदस्यों को, बल्कि पूरे समुदाय और आने वाली पीढ़ियों को भी लाभ मिलेगा।
इस केंद्र का उद्देश्य रचनात्मकता, पारंपरिक शिल्प कौशल, आर्थिक आत्मनिर्भरता और गुरुंग समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना है।
इस पहल की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, जिसमें भारतीय सेना के प्रतिनिधि नायक सूबेदार नवरज बस्नेत और अगमलोक के दोरजी शेरपा पिनासा ने मिलकर काम किया। दोरजी शेरपा पिनासा ने गांव की महिलाओं को जोड़ने के लिए लगातार समन्वय, जागरूकता बैठकों और सामुदायिक लामबंदी के जरिए सक्रिय भूमिका निभाई।
'ल्हाली कुमो' का लक्ष्य पारंपरिक गुरुंग पहनावे और हाथ से बने कपड़ों को बढ़ावा देना है, जिनमें लुकुनी, टोपी, राडी और ऊन से बनी अन्य चीजें शामिल हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक बुनाई कौशल को बचाए रखना, नई पीढ़ी तक इसे पहुंचाना और पारंपरिक उत्पादों के निर्माण व मार्केटिंग के जरिए आजीविका के टिकाऊ अवसर पैदा करना भी है।
'ऑपरेशन सद्भावना' के तहत, भारतीय सेना ने इस केंद्र की मदद के लिए कई तरह के उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई। इनमें इंटरलॉक, इलेक्ट्रिक और सामान्य सिलाई मशीनें; ऊन सुखाने की दो मशीनें; दो वॉशिंग मशीनें; एक डिस्प्ले अलमारी; चार एल्युमिनियम के बर्तन; छह प्लास्टिक के कटोरे; तीन कताई मशीनें; तीन हथकरघा (तान) मशीनें; 220 किलो भेड़ का ऊन; कपड़े सुखाने की एक मशीन; और कैंची, सुइयां व अन्य जरूरी सामान शामिल हैं।
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