गंगटोक: वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने साहित्यकार विजय बंतावा का 28 अक्टूबर की सुबह दार्जिलिंग के पोखरेबुंग के पास स्थित उनके पैतृक गांव सलेम बुंग में निधन हो गया। वे 71 वर्ष के थे।
पत्रकारिता जगत में एक सम्मानित नाम, बंतावा ने लगभग पांच दशकों तक पत्रकारिता और साहित्य की सेवा की।
बंतावा का जन्म 20 अप्रैल 1956 को दार्जिलिंग जिले के सलेम बुंग (जिसे पहले सुलबांग के नाम से जाना जाता था) में हुआ था। वे 1976-77 के आसपास सिक्किम आए, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए सिक्किम गवर्नमेंट कॉलेज में नॉन-टीचिंग स्टाफ के रूप में काम किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए (ऑनर्स) पूरा किया और बाद में कानून की डिग्री हासिल की।
हालांकि उन्होंने कुछ समय के लिए वकालत भी की, लेकिन समाज की सेवा करने और लोगों से जुड़े रहने की चाहत के चलते विजय बंतावा ने पत्रकारिता को चुना। उनके पत्रकारिता सफर की शुरुआत नेपाली साप्ताहिक 'हिमाली बेला' से हुई, जहां उन्होंने लेटरप्रेस के दौर में रिपोर्टिंग और अखबार के प्रकाशन की बुनियादी बातें सीखीं। बाद में, उन्होंने गंगटोक से प्रकाशित होने वाले नेपाली अखबार 'हिमगिरी' के संपादक के रूप में भी काम किया।
मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग-गोले ने वरिष्ठ पत्रकार विजय बंतावा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, "वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और कवि श्री विजय बंतावा के निधन से गहरा दुख हुआ है। सिक्किम के मीडिया और साहित्य जगत में कई दशकों तक दिए गए उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों और पूरे मीडिया जगत के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।"
विजय बंतावा 'प्रेस क्लब ऑफ सिक्किम' के संस्थापक महासचिव थे। उन्हें पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं। वे 'प्रेस क्लब ऑफ सिक्किम' के प्रतिष्ठित 'कंचनजंगा कलम पुरस्कार' से भी सम्मानित हो चुके हैं।
उन्होंने पत्रकारिता में आए बड़े बदलावों को न केवल देखा, बल्कि खुद को उनके अनुरूप ढाला भी—चाहे वह हाथ से टाइप सेट करने और प्रिंटिंग प्रेस का दौर हो, या फिर कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया का समय। वे 'इंडियन फेडरेशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स' और पीआईबी (PIB) की 'सेंट्रल प्रेस एक्रेडिटेशन कमिटी' से भी जुड़े रहे थे। इंटरनेट के शुरुआती दौर में 'हिमगिरी' को ऑनलाइन लाने के उनके प्रयास, नई तकनीक के प्रति उनके खुलेपन को दर्शाते हैं। उनकी किताब 'पत्रकारिताका पक्षहरू' (Patrakaritako Pakshaharu) में उनके अनुभवों और भारतीय नेपाली पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं का दस्तावेजीकरण किया गया है।
सिक्किम में पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
'जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ सिक्किम' (JUS) ने अपने कार्यालय में एक शोक सभा आयोजित की, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार स्वर्गीय विजय बंतावा को श्रद्धांजलि दी गई।
JUS के अध्यक्ष प्रबिन खालिंग, सलाहकार भीम रावत और कार्यकारी सदस्य बिजोय गुरुंग ने इस अनुभवी पत्रकार से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं और सिक्किम के मीडिया जगत में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
इस शोक सभा में, स्वर्गीय विजय बंतावा की स्मृति और सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया और प्रार्थना की गई।
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