सरकारी वेबसाइट हैक करने का दावा, राजस्थान में सर्वर की जांच में जुटी साइबर टीम
राजस्थान में हैकिंग के दावे से हड़कंप
जयपुर: राजस्थान में सरकारी वेबसाइट और ई-मेल डेटा में सेंधमारी के दावे के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर जांच तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा संबंधी सावधानी और सर्वर की जांच के चलते करीब 59 हजार सरकारी ई-मेल खाते प्रभावित हुए हैं। सरकारी ई-मेल सेवा पिछले तीन दिनों से बाधित बताई गई है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सरकार का डेटा सुरक्षित है और शुरुआती जांच में वेबसाइट हैक होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। मामला डार्क वेब पर एक हैकर समूह की ओर से सरकारी डेटा हासिल करने का दावा किए जाने के बाद सामने आया। स्कारलेट नामक समूह ने हजारों मेलबॉक्स और बड़ी संख्या में ई-मेल सहित पहचान रिकॉर्ड तथा मोबाइल नंबरों तक पहुंच होने की बात कही थी। इन दावों के बाद संबंधित विभागों ने तकनीकी जांच और सुरक्षा उपाय शुरू किए। कथित डेटा चोरी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दावे में कितनी सच्चाई है और सरकारी सिस्टम की सुरक्षा की वास्तविक स्थिति क्या है।
सरकारी ई-मेल सेवा पर पड़ा असर
दैनिक नवज्योति की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार के डोमेन से जुड़े 59 हजार से अधिक ई-मेल खाते प्रभावित हैं। इससे विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच नियमित पत्राचार में परेशानी आ रही है। जरूरी संदेश और दस्तावेज भेजने के लिए वॉट्सऐप तथा दूसरे वैकल्पिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ई-मेल सेवा बाधित होने का असर विशेष रूप से उन कार्यों पर पड़ रहा है, जिनमें विभागों के बीच लिखित सूचना और दस्तावेजों का समय पर आदान-प्रदान आवश्यक होता है। रिपोर्ट में पंचायतीराज चुनाव संबंधी प्रशासनिक तैयारियों के बीच इस व्यवधान का भी उल्लेख है। चुनावी कार्यों में कार्मिकों के प्रशिक्षण, मतदान केंद्रों की व्यवस्था, पुलिस तैनाती और कानून-व्यवस्था से जुड़ी सूचनाओं का नियमित संचार जरूरी होता है। ऐसे समय में अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए समन्वय बनाए रखना पड़ रहा है। हालांकि, ई-मेल सेवा प्रभावित होने को किसी चुनावी प्रक्रिया के रुकने या सभी सरकारी सेवाओं के बंद होने के समान नहीं माना जा सकता।
विभाग ने बताया एहतियाती कदम
सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के अतिरिक्त निदेशक देवेश बाड़मेरा ने मीडिया से बातचीत में ई-मेल सेवा बंद करने को सुरक्षा संबंधी सावधानी बताया है। उनके अनुसार, संभावित साइबर खतरे से बचाव के लिए यह कदम उठाया गया और सरकारी डेटा सुरक्षित है। तकनीकी टीमें सिस्टम की जांच तथा उसे दुरुस्त करने में जुटी हैं। सेवा जल्द बहाल होने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में इसके लिए कोई निश्चित समय या तारीख घोषित नहीं की गई है। सरकारी वेबसाइट का नहीं खुलना, ई-मेल सेवा का बाधित होना और डेटा चोरी होना अलग-अलग स्थितियां हैं। किसी वेबसाइट का बंद दिखाई देना अपने आप में हैकिंग का प्रमाण नहीं होता। एनडीटीवी राजस्थान की रिपोर्ट में भी वेबसाइट उपलब्ध नहीं होने और हैकिंग के दावे के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं होने की बात कही गई है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को जांच के दायरे में आए संभावित साइबर सुरक्षा मामले के रूप में प्रस्तुत करना अधिक सटीक है।
साइबर थाने में दर्ज हुआ मामला
हैकर्स के दावों के आधार पर साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से शिकायत दी गई थी। मामले में आईटी अधिनियम की धाराओं का उल्लेख किया गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ दावे की जांच कर रहे हैं। शिकायत और जांच शुरू होना यह दर्शाता है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है, लेकिन इससे कथित डेटा चोरी स्वतः प्रमाणित नहीं हो जाती। केंद्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल यानी CERT-In की टीम भी जांच में शामिल है। सर्वर की तकनीकी पड़ताल और सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है। द सूत्र की रिपोर्ट में जांच पूरी होने तक महत्वपूर्ण सरकारी तथा पुलिस कार्यों के लिए केंद्र सरकार के सर्वर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। फिलहाल प्राथमिकता जरूरी कामकाज जारी रखने के साथ सिस्टम की सुरक्षा की स्थिति स्पष्ट करना है।
59 हजार खाते प्रभावित होने का क्या मतलब है?
प्रभावित ई-मेल खातों की संख्या को चोरी हुए खातों की पुष्ट संख्या नहीं माना जाना चाहिए। करीब 59 हजार खातों का आंकड़ा सेवा बाधित होने के संदर्भ में सामने आया है, जबकि हैकर समूह ने अपने कथित दावे में अलग संख्या में मेलबॉक्स का उल्लेख किया है। दोनों आंकड़ों का अर्थ अलग है। जांच में ही स्पष्ट होगा कि किसी खाते तक अनधिकृत पहुंच हुई या नहीं और यदि हुई तो उसका दायरा कितना था। इस समय मामले के दो प्रमुख पहलू हैं—सरकारी संचार व्यवस्था की बहाली और हैकर्स के दावों की सत्यता की जांच। अधिकारियों ने डेटा सुरक्षित बताया है, जबकि शुरुआती पड़ताल में हैकिंग के प्रमाण नहीं मिलने की जानकारी दी गई है। अंतिम स्थिति तकनीकी जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी। तब तक डेटा चोरी को साबित घटना बताना और सभी प्रभावित ई-मेल खातों को हैक हुआ घोषित करना उपलब्ध जानकारी से आगे जाना होगा।