Punjab.पंजाब: पंजाब और पूरे देश में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर आधारित वेब सीरीज ‘गैंगस्टर’ के महिमामंडन को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस सीरीज में अपराधी के कार्यों को सकारात्मक तरीके से दिखाया गया है, जिससे युवा पीढ़ी में अपराध को सामान्य और स्वीकार्य समझने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वेब सीरीज पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और इसकी सामग्री का मूल्यांकन कर इसे सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने से रोका जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की सामग्री समाज में नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधियों का महिमामंडन करने वाली मीडिया सामग्री विवादास्पद हो सकती है। वेब सीरीज, फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस तरह की घटनाओं का चित्रण अक्सर वास्तविकता और मनोरंजन के बीच संतुलन बनाए बिना किया जाता है। इससे युवा वर्ग में गलत संदेश जाने का खतरा रहता है।
इससे पहले भी लॉरेंस बिश्नोई और अन्य कुख्यात अपराधियों पर आधारित सामग्री को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। सामाजिक संगठनों ने बार-बार चेतावनी दी है कि अपराधियों की जीवनियों और उनके कृत्यों को रोमांचक ढंग में दिखाना समाज में अनुचित प्रभाव डाल सकता है।
वहीं, डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि कंटेंट पर रोक लगाने का निर्णय संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ मामला है। अदालत को यह देखना होगा कि क्या याचिका में उठाए गए बिंदु वास्तविक और समाज के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों से संबंधित हैं, या यह केवल सेंसरशिप की मांग है।
अदालत ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की तारीख तय कर दी है और पक्षकारों से तर्क प्रस्तुत करने को कहा है। यह मामला डिजिटल मीडिया में अपराधियों के चित्रण और समाज पर उसके प्रभाव को लेकर कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस याचिका का समर्थन किया है। उनका कहना है कि अपराधियों को महिमामंडित करने वाली सामग्री रोकना समाज और विशेषकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
अंततः, लॉरेंस बिश्नोई पर आधारित ‘गैंगस्टर’ वेब सीरीज के महिमामंडन पर यह हाईकोर्ट याचिका डिजिटल मीडिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समाज में अपराध के प्रति नजरिए के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है। अदालत का फैसला भविष्य में इसी तरह की सामग्री पर आने वाले विवादों के लिए दिशा-निर्देश का काम कर सकता है।
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