चंडीगढ़। शहर के उत्तरी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा काम पूरा हो गया है। सेक्टर-1 से सेक्टर-8 तक करीब 18 किलोमीटर क्षेत्र में 11 केवी विद्युत नेटवर्क को भूमिगत कर दिया गया है। करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना से लगभग 25 हजार निवासियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, हाईकोर्ट, रॉक गार्डन और सुखना झील जैसे प्रमुख संस्थान और महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इस नेटवर्क के दायरे में आए हैं।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को परियोजना का उद्घाटन किया। भूमिगत बिजली नेटवर्क तैयार होने से उत्तरी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति पहले से अधिक भरोसेमंद होने की उम्मीद है। खुले तारों और ओवरहेड नेटवर्क से जुड़ी कई समस्याओं को कम करने में भी यह परियोजना मददगार साबित हो सकती है।
सेक्टर-1 से 8 तक भूमिगत हुआ नेटवर्क
परियोजना के तहत सेक्टर-1 से सेक्टर-8 तक फैले 11 केवी नेटवर्क को भूमिगत किया गया है। कुल मिलाकर करीब 18 किलोमीटर लंबी बिजली व्यवस्था को जमीन के नीचे स्थानांतरित किया गया है।
शहर के इस हिस्से में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय, पर्यटन स्थल और आवासीय क्षेत्र मौजूद हैं। ऐसे में बिजली नेटवर्क में किसी तरह की खराबी का असर बड़ी संख्या में लोगों और संस्थानों पर पड़ सकता था।
नई व्यवस्था का उद्देश्य बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने के साथ नेटवर्क को अधिक सुरक्षित बनाना है।
25 हजार लोगों को मिलेगा लाभ
इस परियोजना का सीधा फायदा लगभग 25 हजार निवासियों को मिलने की बात कही गई है। भूमिगत केबल नेटवर्क होने से मौसम की खराब परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका कम होगी।
आमतौर पर तेज हवा, बारिश, पेड़ या उनकी शाखाएं गिरने जैसी परिस्थितियों में ओवरहेड बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। तार टूटने या पोल क्षतिग्रस्त होने से कई बार लंबे समय तक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भूमिगत नेटवर्क इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे बार-बार होने वाले व्यवधान में कमी आने के साथ उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर बिजली आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
12 करोड़ रुपये में तैयार हुआ प्रोजेक्ट
पूरी परियोजना पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें 11 केवी नेटवर्क को भूमिगत करने के लिए आवश्यक केबल और उससे जुड़ी बिजली वितरण व्यवस्था विकसित की गई है।
बिजली नेटवर्क को भूमिगत करना तकनीकी रूप से ओवरहेड लाइन की तुलना में अधिक जटिल काम होता है। इसके लिए जमीन के नीचे सुरक्षित तरीके से केबल बिछाने के साथ विभिन्न वितरण बिंदुओं को जोड़ना पड़ता है।
शहरी क्षेत्र में काम के दौरान सड़क, पानी, सीवरेज और अन्य भूमिगत सेवाओं का भी ध्यान रखना होता है। परियोजना पूरी होने के बाद अब इसका लाभ शहर के उत्तरी हिस्से के उपभोक्ताओं को मिलेगा।
हाईकोर्ट और सचिवालय भी दायरे में
इस परियोजना की अहमियत इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसके दायरे में पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान आते हैं। इन स्थानों पर नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है।
सरकारी कामकाज का बड़ा हिस्सा डिजिटल व्यवस्था पर निर्भर होने के कारण बिजली में व्यवधान का असर दैनिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। भूमिगत नेटवर्क से ऐसी बाधाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा आसपास के अन्य सरकारी और आवासीय परिसरों को भी नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
रॉक गार्डन और सुखना झील को भी फायदा
शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल रॉक गार्डन और सुखना झील भी परियोजना के क्षेत्र में हैं। इन स्थानों पर रोजाना बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचते हैं।
ऐसे में आसपास के बिजली नेटवर्क को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने का असर पर्यटन सुविधाओं पर भी पड़ेगा। ओवरहेड तार कम होने से शहर का दृश्य भी अधिक व्यवस्थित दिखाई दे सकता है।
विशेष रूप से हरित क्षेत्रों में पेड़ों की शाखाओं के बिजली तारों से टकराने की समस्या भूमिगत नेटवर्क में नहीं रहती।
खराब मौसम में कम होगा खतरा
बारिश और आंधी के दौरान ओवरहेड बिजली नेटवर्क सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। पेड़ गिरने, तार टूटने या पोल क्षतिग्रस्त होने से बिजली आपूर्ति बंद होने के साथ दुर्घटना का जोखिम भी पैदा हो सकता है।
भूमिगत केबल होने से इस तरह के बाहरी खतरों का प्रभाव काफी कम हो जाता है। हालांकि भूमिगत नेटवर्क में खराबी आने पर उसे तलाशना और मरम्मत करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में इसकी विश्वसनीयता अधिक मानी जाती है।
नई परियोजना से शहर के उत्तरी सेक्टरों में मौसम से संबंधित बिजली व्यवधान कम होने की उम्मीद की जा रही है।
शहर के बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती
बिजली नेटवर्क किसी भी आधुनिक शहर के बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बढ़ती आबादी और बिजली की मांग को देखते हुए वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण जरूरी हो जाता है।
सेक्टर-1 से 8 तक नेटवर्क भूमिगत होने से न केवल वर्तमान उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा, बल्कि भविष्य में बिजली व्यवस्था को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में भी सहायता मिल सकती है।
भूमिगत तारों से बिजली के पोल और खुले तारों की संख्या कम होने के कारण सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और सौंदर्य में भी सुधार की संभावना है।
निर्बाध बिजली आपूर्ति पर जोर
परियोजना का मुख्य उद्देश्य करीब 25 हजार निवासियों और महत्वपूर्ण संस्थानों को अधिक विश्वसनीय बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है। रविवार को उद्घाटन के साथ 12 करोड़ रुपये की यह परियोजना औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
18 किलोमीटर क्षेत्र में 11 केवी नेटवर्क को भूमिगत करने के बाद अब इसके वास्तविक असर पर नजर रहेगी। यदि बिजली कटौती और मौसम के कारण होने वाली तकनीकी खराबियों में कमी आती है तो यह उत्तरी सेक्टरों के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सुधार साबित होगा।