चंडीगढ़ : पंजाब के बरनाला में सामने आए हेरोइन तस्करी मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए बरनाला के एसएसपी को जांच अधिकारी (IO) के आचरण की जांच करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि जब गुप्त सूचना में आरोपी का नाम था, तो वह न तो कथित हेरोइन वाले वाहन में मिला और न ही उसे मौके से गिरफ्तार किया गया।

मामला 1.39 किलोग्राम हेरोइन बरामदगी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 11 दिसंबर 2025 को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग एक सफेद SUV में हेरोइन लेकर जा रहे हैं। सूचना के आधार पर नाकाबंदी की गई और वाहन को रोककर तलाशी ली गई। पुलिस ने दावा किया कि वाहन में सवार दो लोगों से हेरोइन बरामद हुई।
तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी पर उठे सवाल
पुलिस ने बाद में एक तीसरे व्यक्ति को भी मामले में आरोपी बनाया। हालांकि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था और आगे की जांच में भी उसके कब्जे से कोई बरामदगी नहीं हुई। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि गुप्त सूचना में जिस व्यक्ति का नाम था, वह न तो SUV में मौजूद था और न ही घटनास्थल पर पकड़ा गया। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन की ओर से दी गई कहानी की सत्यता का परीक्षण ट्रायल के दौरान होगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सवाल जरूर खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट
जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ ने आरोपी को नियमित जमानत देते हुए बरनाला एसएसपी को निर्देश दिया कि वह जांच अधिकारी की भूमिका की जांच कराएं। अदालत ने कहा कि चालान में आरोपी की गिरफ्तारी और उसकी कथित संलिप्तता को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण की भी समीक्षा की जाए। एसएसपी को चार सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 25 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है।
आरोपी आठ महीने से था जेल में
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आरोपी करीब आठ महीने से अधिक समय से हिरासत में था। उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं था। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आधार के किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।
पुलिस जांच पर उठे सवाल
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने साफ किया है कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच की विश्वसनीयता और आरोपियों की भूमिका को प्रमाणित करना जरूरी है। अब एसएसपी की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामले की जांच में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं और जांच अधिकारी की भूमिका पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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