अमृतसर। पंजाब में ड्यूटी पर तैनात असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) हरजीत सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार देर रात अमृतसर पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में हत्याकांड का मुख्य संदिग्ध दीपक सिंह मारा गया। पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से .30 बोर की एक पिस्टल, दो मैगजीन, आठ जिंदा कारतूस, एक मोबाइल फोन और एक होंडा एक्टिवा स्कूटर बरामद किया गया है। मारे गए संदिग्ध की पहचान अमृतसर के मूले चक गांव निवासी दीपक सिंह के रूप में हुई है।
पुलिस का कहना है कि ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद से ही आरोपी की तलाश की जा रही थी। जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस दीपक सिंह तक पहुंची। शनिवार देर रात उसकी मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई की। इसी दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें दीपक सिंह गोली लगने से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।
ASI की हत्या के बाद से चल रही थी तलाश
ड्यूटी के दौरान ASI हरजीत सिंह की हत्या ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया था। वारदात के बाद पुलिस ने हत्या के पीछे शामिल लोगों की पहचान के लिए बड़े स्तर पर जांच शुरू की थी। घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई।
पुलिस जांच में दीपक सिंह का नाम मुख्य संदिग्ध के तौर पर सामने आने के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई थी। पुलिस की अलग-अलग टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं।
शनिवार देर रात हुआ आमना-सामना
पुलिस के अनुसार शनिवार देर रात दीपक सिंह के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद अमृतसर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान संदिग्ध और पुलिस के बीच गोलीबारी हुई।
मुठभेड़ में दीपक सिंह को गोली लगी। इसके बाद उसे काबू में लिया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ की परिस्थितियों और गोलीबारी के पूरे घटनाक्रम की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
पिस्टल और आठ जिंदा कारतूस बरामद
पुलिस ने घटनास्थल से कई सामान बरामद करने का दावा किया है। इनमें अपराध में इस्तेमाल बताई जा रही .30 बोर की पिस्टल, दो मैगजीन और आठ जिंदा कारतूस शामिल हैं। इसके अलावा एक मोबाइल फोन और होंडा एक्टिवा स्कूटर भी बरामद किया गया है।
पुलिस अब हथियार की फोरेंसिक और बैलिस्टिक जांच के जरिए यह पता लगाएगी कि ASI हरजीत सिंह की हत्या में इसी पिस्टल का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। हथियार से चली गोलियों और हत्या के मामले में मिले बैलिस्टिक साक्ष्यों का मिलान जांच के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मोबाइल फोन से मिल सकते हैं अहम सुराग
दीपक सिंह के पास से बरामद मोबाइल फोन भी जांच में अहम साबित हो सकता है। फोन के कॉल रिकॉर्ड, संदेश, संपर्क और अन्य डिजिटल डेटा के आधार पर पुलिस उसके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटा सकती है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि हत्या से पहले और बाद में दीपक ने किन लोगों से संपर्क किया था। यदि मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी जांच आगे बढ़ाई जा सकती है।
एक्टिवा स्कूटर की भी होगी जांच
पुलिस ने घटनास्थल से होंडा एक्टिवा स्कूटर बरामद किया है। इसकी पहचान, स्वामित्व और कथित अपराध में भूमिका की जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि हत्या के दौरान या उसके बाद फरार होने के लिए इसी वाहन का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
इसके लिए सीसीटीवी फुटेज और वाहन से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। स्कूटर पर मौजूद संभावित फिंगरप्रिंट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
मूले चक गांव का रहने वाला था दीपक
पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ में मारे गए दीपक सिंह की पहचान मूले चक गांव निवासी के रूप में हुई है। ASI हत्याकांड की जांच के दौरान उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी।
अब पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच कर सकती है। यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वह अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति या नेटवर्क भी जुड़ा हुआ था।
हत्या के मकसद की जांच जारी
मुख्य संदिग्ध की मौत के बावजूद ASI हरजीत सिंह हत्याकांड की जांच समाप्त नहीं हुई है। पुलिस के सामने हत्या के मकसद को पूरी तरह स्पष्ट करने के साथ यह पता लगाने की चुनौती है कि वारदात की योजना कैसे बनाई गई और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
बरामद मोबाइल फोन और हथियार से मिलने वाले साक्ष्य इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस घटनास्थल से पहले जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को भी नए तथ्यों के साथ जोड़कर देखेगी।
फोरेंसिक जांच पर टिकी निगाह
पुलिस द्वारा बरामद पिस्टल को हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार बताया जा रहा है, लेकिन इसकी निर्णायक पुष्टि फोरेंसिक जांच से होगी। बैलिस्टिक विशेषज्ञ पिस्टल और मामले में मिले कारतूस या गोली के अवशेषों का परीक्षण कर सकते हैं।
इसी तरह मोबाइल फोन की डिजिटल फोरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है। इससे संदिग्ध की गतिविधियों और संपर्कों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।
आगे भी जारी रहेगी जांच
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ASI हरजीत सिंह हत्याकांड में मुख्य संदिग्ध की तलाश समाप्त हो गई है, लेकिन पूरे मामले से जुड़े सवालों की जांच जारी रहेगी। पुलिस को अब उपलब्ध भौतिक, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी होंगी।
फिलहाल पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से हथियार, कारतूस, मोबाइल और स्कूटर बरामद करने की जानकारी दी है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि हत्या के पीछे क्या मकसद था और क्या इसमें दीपक सिंह के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।