स्नान पूर्णिमा पर रेत में उभरी जगन्नाथ महिमा, सुदर्शन पटनायक की कला ने मोहा मन
Puri पुरी। ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर प्रसिद्ध रेत कलाकार Sudarsan Pattnaik ने स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ को समर्पित आकर्षक रेत कलाकृति बनाकर श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपनी कलाकृति के माध्यम से ‘जय जगन्नाथ’ का संदेश दिया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
स्नान पूर्णिमा जगन्नाथ परंपरा के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। यह उत्सव हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है तथा उन्हें 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। इस अनुष्ठान को देखने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
सुदर्शन पटनायक ने अपनी रेत कला के माध्यम से भगवान जगन्नाथ की महिमा और स्नान पूर्णिमा के धार्मिक महत्व को दर्शाने का प्रयास किया। उनकी कलाकृति को देखने के लिए समुद्र तट पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने इस अनूठी कला की सराहना करते हुए तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए।
पुरी में स्नान पूर्णिमा के साथ ही वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियां भी तेज हो जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ कुछ दिनों तक अनवसर (विश्राम काल) में रहते हैं और इसके बाद भव्य रथ यात्रा में भक्तों को दर्शन देते हैं। रेत कला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके सुदर्शन पटनायक समय-समय पर सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों पर अपनी कलाकृतियों के माध्यम से संदेश देते रहे हैं। उनकी यह नई रचना भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।