यूकेलिप्टस पेड़ों की कथित अवैध कटाई और पैसों के लेन-देन का मामला, नबरंगपुर में फॉरेस्टर सस्पेंड
नबरंगपुर। ओडिशा के नबरंगपुर जिले में वन विभाग ने कथित तौर पर बिना अनुमति यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई और संदिग्ध पैसों के लेन-देन से जुड़े मामले में एक फॉरेस्टर के खिलाफ कार्रवाई की है। नबरंगपुर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) उदयन सुबुद्धि (IFS) ने फॉरेस्टर बिपिन कुमार हरिजन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
विभाग की ओर से जारी कार्यालय आदेश के मुताबिक, यह कार्रवाई देवबंधा-जमादारपाडा रोड के किनारे यूकेलिप्टस के पेड़ों की कथित तौर पर बिना अनुमति कटाई से जुड़े शुरुआती साक्ष्य सामने आने के बाद की गई। इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ झारीगांव रेंज के अंतर्गत मोहरा सेक्शन में तैनाती के दौरान कथित गैर-कानूनी पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।
DFO के आदेश में झारीगांव के प्रभारी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) की 31 अगस्त 2026 की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। यह रिपोर्ट मेमो नंबर 608 के माध्यम से प्रस्तुत की गई थी। विभाग के अनुसार, रिपोर्ट में हरिजन के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कुछ तथ्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्य सामने रखे गए थे।
बताया गया है कि बिपिन कुमार हरिजन जब झारीगांव रेंज के तहत मोहरा सेक्शन में फॉरेस्टर के रूप में काम कर रहे थे, उस अवधि से जुड़े कुछ पैसों के लेन-देन विभाग की जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि, इन लेन-देन की पूरी प्रकृति और उसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
वन विभाग ने मामले में कार्रवाई करने से पहले संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया था। विभाग ने 1 अगस्त 2026 को मेमो नंबर 5119 के जरिए हरिजन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में उनसे कथित अनियमितताओं को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
कारण बताओ नोटिस का जवाब मिलने के बाद विभाग ने उसका परीक्षण किया। DFO के कार्यालय आदेश में कहा गया है कि हरिजन की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। विभाग के मुताबिक, उपलब्ध तथ्यों और जवाब के परीक्षण के बाद मामले में गंभीर अनियमितताएं प्रथम दृष्टया सामने आईं।
इसके बाद DFO ने निलंबन की कार्रवाई की। निलंबन के दौरान संबंधित कर्मचारी पर विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। मामले की जांच पूरी होने के बाद यह तय होगा कि आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और कर्मचारी के खिलाफ अंतिम विभागीय दंड क्या होगा।
पेड़ों की कटाई भी जांच के घेरे में
मामले का एक प्रमुख हिस्सा देवबंधा-जमादारपाडा रोड के किनारे लगाए गए यूकेलिप्टस के पेड़ों की कथित बिना अनुमति कटाई से जुड़ा है। वन विभाग को इस संबंध में शुरुआती स्तर पर कुछ ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर संबंधित कर्मचारी की भूमिका की जांच शुरू की गई।
यूकेलिप्टस तेजी से बढ़ने वाली प्रजाति है और कई क्षेत्रों में इसे व्यावसायिक उपयोग तथा अन्य उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है। किसी क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए संबंधित भूमि की स्थिति, पेड़ों के स्वामित्व और लागू वन एवं राजस्व नियमों के आधार पर आवश्यक अनुमति की जरूरत हो सकती है।
ऐसे में बिना अनुमति पेड़ काटे जाने की शिकायत मिलने पर वन विभाग को यह जांचना होता है कि पेड़ किस भूमि पर थे, उन्हें काटने की अनुमति किसने दी थी और कटाई के पीछे किसकी भूमिका थी। नबरंगपुर मामले में भी इसी तरह के सवालों की जांच की जा रही है।
31 अगस्त की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
DFO के आदेश में 31 अगस्त 2026 को झारीगांव के प्रभारी FRO की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। मेमो नंबर 608 वाली इस रिपोर्ट में हरिजन के खिलाफ कथित गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन से संबंधित परिस्थितियों का उल्लेख किया गया था।
विभाग ने रिपोर्ट मिलने के बाद पहले से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का भी परीक्षण किया। इसके बाद DFO ने माना कि जवाब संतोषजनक नहीं है और मामले में गंभीर गड़बड़ियां प्रथम दृष्टया सामने आती हैं।
हालांकि विभागीय आदेश में जिन वित्तीय लेन-देन का उल्लेख किया गया है, उनकी राशि और प्रत्येक लेन-देन का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इस स्तर पर किसी निश्चित रकम या किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का दावा करना उचित नहीं होगा।
निलंबन के दौरान क्या होगा
सरकारी कर्मचारी को निलंबित किया जाना अंतिम रूप से दोषी ठहराया जाना नहीं होता। निलंबन आमतौर पर जांच के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में किया जाता है, ताकि विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कर सके और संबंधित कर्मचारी को उसके सामान्य पद पर रहते हुए जांच को प्रभावित करने की संभावना से बचाया जा सके।
बिपिन कुमार हरिजन के मामले में भी अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो विभागीय प्रक्रिया के अनुसार अलग निर्णय लिया जा सकता है।
पहले नोटिस, फिर निलंबन
इस मामले में विभाग की कार्रवाई एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ती दिखाई देती है। पहले 1 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसके बाद संबंधित कर्मचारी से जवाब मांगा गया। फिर 31 अगस्त को प्रभारी FRO की रिपोर्ट विभाग के सामने आई। जवाब की समीक्षा और उपलब्ध तथ्यों के आकलन के बाद DFO ने निलंबन का आदेश जारी किया।
विभाग की ओर से अपनाई गई इस प्रक्रिया का उद्देश्य कर्मचारी को आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी है। हालांकि निलंबन आदेश में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
वन विभाग में निगरानी पर जोर
नबरंगपुर जैसे वन क्षेत्र वाले जिलों में पेड़ों की कटाई, वन संसाधनों के इस्तेमाल और विभागीय अनुमति से जुड़े मामलों की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। वन कर्मचारियों की जिम्मेदारी में क्षेत्र की निगरानी, अवैध कटाई की रोकथाम और वन नियमों के पालन को सुनिश्चित करना शामिल होता है।
ऐसे में किसी कर्मचारी पर ही पेड़ों की कथित बिना अनुमति कटाई और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप सामने आने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जाती है। इस मामले में DFO ने उपलब्ध शुरुआती जानकारी और रिपोर्टों के आधार पर निलंबन का निर्णय लिया है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल बिपिन कुमार हरिजन के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के स्तर पर हैं। विभाग ने उनके जवाब को असंतोषजनक मानते हुए गंभीर अनियमितताओं का प्रथम दृष्टया उल्लेख किया है। लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
अब जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि देवबंधा-जमादारपाडा रोड के किनारे यूकेलिप्टस के पेड़ों की कटाई किन परिस्थितियों में हुई, क्या इसके लिए कोई वैध अनुमति मौजूद थी और संबंधित कर्मचारी की वास्तविक भूमिका क्या थी। साथ ही मोहरा सेक्शन में कथित वित्तीय लेन-देन का स्वरूप, राशि और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के बाद सामने आ सकती है।
नबरंगपुर DFO के आदेश के बाद मामले में विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ गई है। फिलहाल फॉरेस्टर बिपिन कुमार हरिजन निलंबित हैं और वन विभाग मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा रिपोर्टों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। अंतिम जिम्मेदारी और संभावित दंड का फैसला जांच पूरी होने के बाद ही किया जाएगा।