विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ: रथयात्रा इस बार भक्ति और बारिश के अनोखे संगम की गवाह बनी। हर साल जहां रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से राहत देने के लिए इंतजाम किए जाते हैं, वहीं इस बार मौसम ने अपना अलग ही रंग दिखाया। लगातार हुई बारिश के कारण लाखों श्रद्धालुओं को गर्मी से नहीं बल्कि बारिश से बचने की चिंता करनी पड़ी। हालांकि, खराब मौसम के बावजूद भक्तों के उत्साह और आस्था में कोई कमी देखने को नहीं मिली।

भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन और रथों के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे। अनुमान के मुताबिक, इस साल रथयात्रा में सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। बारिश के बीच भी भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ रथयात्रा में हिस्सा लिया और भगवान के जयकारों के साथ रथों की रस्सियां खींचीं।

रथयात्रा के दौरान पुरी का प्रसिद्ध बड़दांड इलाका पूरी तरह श्रद्धालुओं से भरा नजर आया। आमतौर पर रथयात्रा के समय तेज गर्मी और उमस को देखते हुए प्रशासन की ओर से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को राहत मिल सके। लेकिन इस बार मौसम ने ऐसी करवट बदली कि प्रशासन को पानी छिड़कने की जरूरत ही नहीं पड़ी। लगातार बारिश के कारण श्रद्धालुओं को खुद को भीगने से बचाने के लिए छाते, रेनकोट और प्लास्टिक शीट का सहारा लेना पड़ा।

बारिश शुरू होते ही पुरी में अस्थायी दुकानों पर छाते, रेनकोट और प्लास्टिक कवर की मांग अचानक बढ़ गई। बड़दांड सहित आसपास के इलाकों में इन सामानों की बिक्री के लिए लगी दुकानों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जिन लोगों के पास पहले से बारिश से बचने की कोई व्यवस्था नहीं थी, उनके लिए यही सामान सबसे बड़ा सहारा बन गया।

व्यापारियों के अनुसार, इस बार रथयात्रा के दौरान बारिश से बचाव के सामान की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। कई दुकानदारों का कहना है कि कुछ ही घंटों में उनके पास मौजूद छाते और रेनकोट का स्टॉक खत्म हो गया। अचानक बढ़ी मांग के कारण कई व्यापारियों को दोबारा सामान मंगवाना पड़ा।

अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने बारिश से बचाव के लिए छाते, रेनकोट और प्लास्टिक कवर खरीदे। इससे पुरी के बाजार में लगभग पांच करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह बारिश आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुई।

दरअसल, रथयात्रा से एक दिन पहले ही पुरी में तेज बारिश शुरू हो गई थी। बुधवार से शुरू हुई बारिश गुरुवार को भी जारी रही। पूरे शहर में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। जहां आमतौर पर रथयात्रा के दौरान धूप और गर्मी से बचने के लिए लोग परेशान होते हैं, वहीं इस बार श्रद्धालु बारिश से बचने के इंतजाम करते दिखाई दिए।

बारिश के कारण बड़दांड का नजारा भी अलग दिखाई दिया। हजारों श्रद्धालु रंग-बिरंगे रेनकोट और छातों के साथ रथयात्रा में शामिल हुए। बारिश की बूंदों के बीच भगवान जगन्नाथ के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों की आस्था पहले की तरह मजबूत नजर आई।

रथयात्रा में मौसम की चुनौती के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। भक्तों ने बारिश में भीगते हुए भगवान के दर्शन किए और रथों को खींचने में हिस्सा लिया। इस बार की रथयात्रा इसलिए भी यादगार बन गई क्योंकि इसमें भक्ति के साथ प्रकृति का अलग रूप देखने को मिला।

पुरी की इस ऐतिहासिक रथयात्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रद्धा और आस्था के सामने मौसम की बाधाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। बारिश जहां श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बनी, वहीं स्थानीय व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त कारोबार का अवसर लेकर आई। इस तरह इस वर्ष की रथयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी खास रही।

Tags: