अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने का आरोप, चुनाव अधिकारी के पास पहुंची BJD
भुवनेश्वर। ओडिशा में मतदाता सूची में सुधार की चल रही प्रक्रिया के बीच सियासी विवाद खड़ा हो गया है। बीजू जनता दल (BJD) ने आरोप लगाया है कि राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मतदाताओं के नाम जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने इस कथित गड़बड़ी को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चुनाव अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
BJD के उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंपते हुए मामले की जांच कराने की मांग की।
पार्टी का दावा है कि धामनगर अधिसूचित क्षेत्र परिषद (NAC) के अंतर्गत आने वाले 19 मतदान केंद्रों पर करीब 3,165 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का प्रयास किया गया। BJD ने आरोप लगाया कि मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया में कथित हेरफेर के जरिए इन नामों को निशाना बनाया गया।
19 बूथ और 3,165 वोटरों का मामला
BJD की ओर से मुख्य चुनाव अधिकारी के सामने रखे गए मामले में धामनगर NAC के 19 मतदान केंद्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। पार्टी का कहना है कि इन मतदान केंद्रों से जुड़े करीब 3,165 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
पार्टी ने इसे सामान्य सुधार या सत्यापन की प्रक्रिया का हिस्सा मानने से इनकार करते हुए आरोप लगाया कि विशेष मतदाताओं को निशाना बनाया गया है। BJD का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इन सभी मामलों की विस्तार से जांच जरूरी है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या विवरण में संशोधन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है। किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले आवश्यक सत्यापन और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी होता है। BJD ने इसी सत्यापन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
चुनाव अधिकारी को सौंपे दस्तावेज
देबी प्रसाद मिश्रा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने केवल मौखिक शिकायत नहीं की, बल्कि अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और सबूत भी मुख्य चुनाव अधिकारी को सौंपे हैं। पार्टी चाहती है कि चुनाव प्रशासन इन दस्तावेजों की जांच करे और यह पता लगाए कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है या नहीं।
BJD ने मांग की है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बदलाव पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। पार्टी का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई योग्य मतदाता सूची से बाहर न हो।
AERO के खिलाफ कार्रवाई की मांग
BJD ने कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने चुनाव अधिकारियों से कहा है कि आरोपों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
BJD का कहना है कि यदि सत्यापन प्रक्रिया में किसी अधिकारी ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि प्रभावित बताए जा रहे सभी मतदाताओं के मामलों की दोबारा जांच कराई जाए, जिससे किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे।
अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप
इस पूरे विवाद का सबसे गंभीर पहलू BJD का यह आरोप है कि कथित तौर पर अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाया गया। पार्टी के मुताबिक यह सामान्य प्रशासनिक गलती का मामला नहीं है, बल्कि कुछ खास मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई है।
हालांकि आरोपों की सत्यता आधिकारिक जांच के बाद ही स्थापित हो सकेगी। चुनाव प्रशासन की ओर से यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि जिन 3,165 नामों का जिक्र BJD ने किया है, उनके संबंध में वास्तव में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और नाम हटाने के लिए क्या आधार बताए गए थे।
वोटर लिस्ट में नाम की सुरक्षा पर जोर
मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी आधार होती है। इसमें केवल पात्र मतदाताओं के नाम शामिल हों और किसी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे, इसे सुनिश्चित करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसी वजह से मतदाता सूची में संशोधन के दौरान सत्यापन और आपत्ति की व्यवस्था रखी जाती है।
BJD ने चुनाव अधिकारियों से मांग की है कि पूरी प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाई जाए। जिन स्थानों से बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदन या प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, वहां अतिरिक्त सत्यापन कराने की मांग भी की गई है।
चुनावी माहौल में गरमाया मुद्दा
मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा सकता है। BJD ने इसे मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ते हुए चुनाव प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अब नजर मुख्य चुनाव अधिकारी के स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
पार्टी द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों की जांच में यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल हो सकती है। वहीं यदि नाम हटाने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है तो चुनाव प्रशासन को आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
फिलहाल BJD ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर चुनाव अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी है और चाहती है कि धामनगर NAC के सभी संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच हो। पार्टी की प्रमुख मांग है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न हो।