
रायगढ़। जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक परिवार के पांच सदस्यों द्वारा कलेक्टर के शिकायत सेल में आत्महत्या की कोशिश किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमादेईपेंथा गांव निवासी यदाला गंगुलु और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों ने कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। परिवार का आरोप है कि जमीन विवाद को लेकर लगातार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
बताया जा रहा है कि यदाला गंगुलु का परिवार करीब चार दशकों से लगभग तीन एकड़ सरकारी जमीन पर खेती करता आ रहा है। परिवार के पास आय का कोई अन्य प्रमुख साधन नहीं होने के कारण इसी जमीन पर होने वाली खेती से उनका जीवन-यापन चलता है।
हाल ही में एक अन्य व्यक्ति ने कथित तौर पर इस जमीन पर अपना मालिकाना हक जताया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया और गंगुलु ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की।
करीब 40 साल से जमीन पर खेती करने का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंगुलु का परिवार लगभग 40 वर्षों से संबंधित जमीन पर खेती कर रहा है। परिवार का कहना है कि खेती से होने वाली आमदनी ही उनके जीवन-यापन का मुख्य सहारा है।
विवाद तब बढ़ा जब दूसरे व्यक्ति ने जमीन पर अपना अधिकार जताना शुरू किया। इसके बाद परिवार के सामने जमीन हाथ से निकलने की आशंका पैदा हो गई।
परिवार ने मामले के समाधान के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया। जमीन से जुड़े दस्तावेजों और कब्जे की वास्तविक स्थिति को लेकर प्रशासन से जांच और उचित निर्णय की मांग की गई।
कलेक्टर के शिकायत सेल पहुंचे थे परिजन
जमीन विवाद का समाधान नहीं होने पर गंगुलु अपने परिवार के सदस्यों के साथ कलेक्टर के शिकायत सेल पहुंचे। उनका उद्देश्य अपनी समस्या वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखकर समाधान हासिल करना था।
परिवार का आरोप है कि लंबे समय से जमीन पर खेती करने के बावजूद उनकी शिकायत का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इससे वे काफी परेशान थे।
इसी दौरान शिकायत सेल में परिवार के पांच सदस्यों ने कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की। घटना सामने आते ही वहां मौजूद लोगों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया।
एक साथ पांच लोगों के कदम से मचा हड़कंप
एक ही परिवार के पांच लोगों द्वारा आत्महत्या की कोशिश की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई। ऐसे मामलों में सबसे पहली प्राथमिकता प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना होती है।
परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उपलब्ध शुरुआती विवरण में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। उनकी मौजूदा स्थिति के संबंध में आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि जमीन विवाद को लेकर परिवार ने इससे पहले किन-किन अधिकारियों से संपर्क किया था और उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई।
जमीन के वास्तविक अधिकार की जांच जरूरी
इस पूरे विवाद का केंद्र करीब तीन एकड़ सरकारी जमीन है। परिवार जहां चार दशक से उस पर खेती करने का दावा कर रहा है, वहीं एक अन्य व्यक्ति की ओर से जमीन पर मालिकाना अधिकार जताए जाने की बात सामने आई है।
अब राजस्व रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है। सरकारी जमीन होने की स्थिति में उस पर खेती या कब्जे से जुड़े नियम क्या लागू होते हैं, यह भी प्रशासनिक जांच का हिस्सा हो सकता है।
किसी व्यक्ति का लंबे समय तक जमीन पर खेती करना और जमीन का कानूनी स्वामित्व दो अलग-अलग विषय हो सकते हैं। इसलिए पूरे विवाद का समाधान राजस्व रिकॉर्ड और लागू कानूनों के आधार पर ही संभव होगा।
परिवार का दावा इसी जमीन से चलता है घर
गंगुलु परिवार के लिए यह विवाद इसलिए भी गंभीर बताया जा रहा है क्योंकि उनका दावा है कि उनके पास आजीविका का कोई दूसरा प्रमुख साधन नहीं है। परिवार लंबे समय से इसी जमीन पर खेती कर अपनी जरूरतें पूरी करता रहा है।
ऐसे में जमीन पर दूसरे व्यक्ति की ओर से दावा किए जाने के बाद परिवार को अपने भविष्य और आजीविका को लेकर चिंता पैदा हुई।
हालांकि जमीन पर दूसरे पक्ष के दावे और उसके पास मौजूद दस्तावेजों के बारे में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही दोनों पक्षों के दावों की स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
कलेक्टर के शिकायत सेल जैसे मंच का उद्देश्य लोगों की शिकायतों को सुनना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनका समाधान कराना होता है। इसी जगह परिवार द्वारा आत्महत्या की कोशिश किए जाने के बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया है।
अब यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि परिवार ने पहले कब शिकायत की थी, उसकी शिकायत किस विभाग को भेजी गई और उस पर अब तक क्या कदम उठाए गए थे।
यदि मामले में किसी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल भी उठ सकता है। हालांकि इस संबंध में निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत
घटना के बाद सबसे महत्वपूर्ण पहलू परिवार के पांचों सदस्यों को उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और जमीन विवाद की निष्पक्ष जांच करना है।
राजस्व दस्तावेजों, पुराने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही परिवार की ओर से पूर्व में की गई शिकायतों का रिकॉर्ड भी देखा जा सकता है।
फिलहाल इस घटना ने जमीन विवाद और शिकायतों के समयबद्ध समाधान की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। परिवार के आरोपों और जमीन पर दूसरे पक्ष के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।





