भद्रक। ओडिशा के भद्रक जिले में संपत्ति से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। धामनगर थाना क्षेत्र के हबीबनगर इलाके की रहने वाली आयशा बीबी ने अपने पति और दो बेटों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि उसे सरकारी रिकॉर्ड में कथित तौर पर मृत घोषित कर उसकी जमीन और घर को अपने नाम करा लिया गया।

मामला सामने आने के बाद आयशा बीबी ने भद्रक के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी संपत्ति वापस दिलाने और कथित धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

खुद को जिंदा साबित करने के लिए संघर्ष

आयशा बीबी का आरोप है कि वह जीवित होने के बावजूद सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत दिखा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर उसकी संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन और घर पर दूसरे लोगों का अधिकार दर्ज करा दिया गया।

महिला के मुताबिक, जब उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने की कोशिश की। उनका कहना है कि अपनी संपत्ति पर अधिकार साबित करने के लिए उन्हें अब सरकारी कार्यालयों और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि शिकायतकर्ता के अनुसार, कथित धोखाधड़ी में उनके अपने पति और दो बेटे शामिल हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

अपनी शिकायत को लेकर आयशा बीबी भद्रक के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। वहां उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की।

महिला ने अधिकारियों से आग्रह किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु दर्ज किए जाने की प्रक्रिया की जांच हो। उन्होंने यह भी मांग की कि संपत्ति के दस्तावेजों में कथित तौर पर किए गए बदलावों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

आयशा बीबी का कहना है कि यदि किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किया गया है तो यह गंभीर प्रशासनिक और कानूनी मामला है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड दुरुस्त करने और अपनी संपत्ति पर अधिकार बहाल कराने की मांग की है।

जमीन और मकान अपने नाम कराने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पति और दोनों बेटों ने कथित तौर पर उन्हें मृत दिखाने के बाद उनकी जमीन और मकान को अपने नाम कराने की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, संपत्ति के दस्तावेजों में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के माध्यम से किए गए, यह जांच का विषय है।

पुलिस और प्रशासन के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि सरकारी रिकॉर्ड में महिला की मृत्यु दर्ज करने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, संपत्ति के स्वामित्व में बदलाव के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और उनकी सत्यता की जांच किस स्तर पर हुई, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

दस्तावेजों की जांच जरूरी

ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र, जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज और पहचान संबंधी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। यदि महिला के आरोप सही पाए जाते हैं तो दस्तावेजों में कथित हेरफेर करने वाले लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

पुलिस के सामने यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज करने की प्रक्रिया किस कार्यालय से शुरू हुई और उसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।

मामले की जांच के दौरान संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और संपत्ति दस्तावेजों का सत्यापन किया जा सकता है। इसके अलावा शिकायतकर्ता और आरोपित पक्ष के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।

परिवार के भीतर संपत्ति विवाद का मामला

मामला परिवार के भीतर संपत्ति के विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। सामान्य तौर पर संपत्ति संबंधी विवादों में परिवार के सदस्यों के बीच लंबे समय से मतभेद देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी जीवित व्यक्ति को रिकॉर्ड में मृत दिखाकर संपत्ति अपने नाम कराने का आरोप इसे गंभीर बना देता है।

आयशा बीबी ने अपने पति और दोनों बेटों पर सीधे आरोप लगाए हैं। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

महिला ने मांगी सख्त कार्रवाई

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान आयशा बीबी ने मांग की कि उनकी जमीन और घर उन्हें वापस दिलाया जाए। उन्होंने कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।

महिला का कहना है कि वह जीवित हैं और उनके नाम से जुड़ी संपत्ति पर किसी अन्य व्यक्ति का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से सरकारी रिकॉर्ड में अपनी स्थिति तत्काल स्पष्ट करने और कथित रूप से बदले गए दस्तावेजों को दुरुस्त कराने की अपील की है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर

फिलहाल मामले में शिकायतकर्ता की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी रिकॉर्ड में महिला को मृत घोषित करने की प्रक्रिया कैसे हुई और संपत्ति के दस्तावेजों में किस तरह बदलाव किया गया।

मामले में यदि दस्तावेजों की जांच के दौरान किसी तरह की जालसाजी या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

भद्रक जिले का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक जीवित महिला को कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उसकी संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। अब शिकायतकर्ता की नजर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर है। वहीं, जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और संपत्ति विवाद से जुड़े पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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