मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क में बाघिन ‘बिजली’ की मौत, 18 साल से ज्यादा थी उम्र
मुंबई। मुंबई के बोरीवली स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क (SGNP) से एक दुखद खबर सामने आई है। पार्क में लंबे समय से रह रही बाघिन ‘बिजली’ (T2) की बुधवार 16 सितंबर की रात मौत हो गई। वह करीब 18 साल और चार महीने की थी।
संजय गांधी नेशनल पार्क प्रशासन के अनुसार, बाघिन बिजली पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी। बुधवार रात करीब 9:45 बजे उसने अंतिम सांस ली। उसकी मौत के बाद पार्क प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक का माहौल है।
लंबे समय से पार्क की पहचान थी ‘बिजली’
बाघिन बिजली संजय गांधी नेशनल पार्क की प्रमुख पहचान में शामिल रही। वर्ष 2016 से वह पार्क में रह रही थी और इस दौरान बड़ी संख्या में पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने उसे देखा था।
बिजली को उसकी उम्र, व्यवहार और पार्क में लंबे समय तक रहने के कारण विशेष पहचान मिली थी। वह मुंबई के इस प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीव संरक्षण की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
उम्र संबंधी समस्याओं से थी परेशान
पार्क प्रशासन के मुताबिक, बढ़ती उम्र के कारण बाघिन बिजली को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
वन्यजीवों में उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक क्षमता कम होने लगती है और कई तरह की स्वास्थ्य परेशानियां सामने आती हैं। प्रशासन ने बताया कि बिजली की देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जा रही थी।
हालांकि, उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बुधवार रात उसकी मौत हो गई।
वन्यजीव प्रेमियों में शोक
बिजली की मौत की खबर सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों ने दुख जताया। कई लोगों के लिए वह संजय गांधी नेशनल पार्क की खास पहचान बन चुकी थी।
लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बाघिन को श्रद्धांजलि दी और उसके संरक्षण में योगदान देने वाले वन विभाग के प्रयासों की सराहना की।
SGNP में बाघ संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा
संजय गांधी नेशनल पार्क मुंबई शहर के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र है। यहां विभिन्न प्रकार के वन्यजीव पाए जाते हैं और यह देश के प्रमुख शहरी राष्ट्रीय उद्यानों में शामिल है।
बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बनाए रखने के लिए पार्क प्रशासन लगातार काम करता है। बिजली भी इसी संरक्षण प्रयास का हिस्सा रही।
18 साल से ज्यादा उम्र तक जीवित रही बिजली
बाघों की औसत उम्र जंगल में सामान्य रूप से कम होती है, जबकि संरक्षण केंद्रों और बेहतर देखभाल वाले स्थानों पर वे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं।
बिजली का 18 साल से अधिक उम्र तक जीवित रहना उसके लिए की गई देखभाल और संरक्षण प्रयासों को भी दर्शाता है।
पार्क प्रशासन ने दी जानकारी
संजय गांधी नेशनल पार्क प्रशासन ने बाघिन की मौत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
प्रशासन की ओर से वन्यजीव विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने लंबे समय तक उसकी देखभाल की। मौत के बाद आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिए संदेश
बिजली की मौत ने एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण के महत्व को सामने रखा है। वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण और बेहतर देखभाल उनके अस्तित्व के लिए जरूरी है।
संजय गांधी नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों की भूमिका शहरों के बीच जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
मुंबई की यादों का हिस्सा बनी रही
मुंबई के लोगों और पर्यटकों के लिए बाघिन बिजली केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि संजय गांधी नेशनल पार्क की एक खास पहचान थी।
उसकी मौजूदगी ने कई लोगों को वन्यजीवों के करीब आने और संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर दिया। अब उसके निधन के बाद पार्क में उसकी कमी महसूस की जाएगी।