मुंबई। महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन सरकार ने जिला स्तर पर विकास फंड के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। गठबंधन ने जिला योजना समिति (DPDC) के तहत उपलब्ध विकास निधि के वितरण का फॉर्मूला तय कर लिया है। वहीं, विभिन्न सरकारी कॉर्पोरेशन और बोर्डों के आवंटन की प्रक्रिया भी अगले 15 दिनों में पूरी किए जाने की उम्मीद है। इन मुद्दों पर महायुति समन्वय समिति की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में गठबंधन के भीतर स्थानीय स्तर पर सहयोगी दलों के बीच चल रहे मतभेदों, सरकारी कॉर्पोरेशन के लंबित आवंटन और जिला योजना समिति के फंड के वितरण सहित कई मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य गठबंधन के तीनों प्रमुख घटकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और सरकार के साथ-साथ संगठन के स्तर पर तालमेल को मजबूत करना रहा।
महायुति में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गुट शामिल हैं। राज्य में सत्ता संभालने के बाद से ही अलग-अलग स्तरों पर पदों और संसाधनों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। स्थानीय निकायों और जिला स्तर पर इन मतभेदों का असर प्रशासनिक कामकाज और राजनीतिक समन्वय पर पड़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अब समन्वय समिति के स्तर पर इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।
बैठक में जिला योजना समिति के फंड के बंटवारे को लेकर भी चर्चा हुई। जिला स्तर पर विकास कार्यों के लिए यह निधि महत्वपूर्ण होती है। अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और अन्य स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े काम इसी तरह के फंड से किए जाते हैं। ऐसे में निधि के वितरण को लेकर गठबंधन सहयोगियों और स्थानीय नेताओं की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं होती हैं।
महायुति ने अब इस फंड के वितरण के लिए एक साझा फॉर्मूला तय किया है। इससे जिलों में विकास निधि के आवंटन को लेकर सहयोगी दलों के बीच होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। फॉर्मूले के आधार पर जिला स्तर पर निधि के इस्तेमाल और प्राथमिकता वाले विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
बैठक में सरकारी कॉर्पोरेशन और बोर्डों के लंबित आवंटन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। गठबंधन सरकार में विभिन्न सरकारी निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य पदों पर नियुक्तियों को लेकर सहयोगी दलों के बीच हिस्सेदारी का सवाल लंबे समय से चर्चा में रहा है। इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से गठबंधन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष की स्थिति बनी हुई थी।
अब इन आवंटनों को तेजी से पूरा करने पर सहमति बनी है। खबरों के मुताबिक, अलग-अलग सरकारी कॉर्पोरेशन और निकायों में पदों के बंटवारे की प्रक्रिया अगले 15 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। इससे गठबंधन के भीतर पदों को लेकर चल रही अनिश्चितता समाप्त करने की कोशिश की जाएगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वरिष्ठ नेताओं को गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच मतभेदों को समय रहते सुलझाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री की ओर से यह संदेश दिया गया कि स्थानीय स्तर पर होने वाले विवादों का असर गठबंधन की सरकार और उसके कामकाज पर नहीं पड़ना चाहिए।
महायुति नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय स्तर पर सहयोगी दलों के बीच समन्वय कायम करने की है। राज्य स्तर पर गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच राजनीतिक समझ बनी हुई है, लेकिन जिला और स्थानीय स्तर पर कई बार अलग-अलग दलों के नेताओं के हित टकराते हैं। सीटों, पदों, विकास निधि और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं।
वरिष्ठ नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों को बढ़ने से पहले आपसी बातचीत के जरिए हल करें। माना जा रहा है कि जिला स्तर पर समन्वय मजबूत करने के लिए गठबंधन के नेताओं के बीच नियमित संवाद की व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तीनों दल सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को मिलकर आगे बढ़ाएं।
महायुति के लिए जिला स्तर पर फंड का वितरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विकास कार्यों का सीधा असर जनता के बीच सरकार की छवि पर पड़ता है। यदि निधि के आवंटन को लेकर सहयोगी दलों के बीच विवाद होता है तो इसका असर विकास परियोजनाओं की गति पर पड़ सकता है। इसलिए तय फॉर्मूले के जरिए प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और विवादमुक्त बनाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, सरकारी कॉर्पोरेशन के आवंटन का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम है। इन निकायों में पद मिलने से गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सरकार में जिम्मेदारी का अवसर मिलता है। लंबे समय से नियुक्तियां लंबित रहने के कारण कई नेताओं में नाराजगी की खबरें थीं। ऐसे में अगले 15 दिनों में आवंटन पूरा करने का निर्णय गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समन्वय समिति की बैठक के फैसलों से संकेत मिलता है कि महायुति नेतृत्व अब सरकार के कामकाज के साथ संगठनात्मक तालमेल को भी प्राथमिकता दे रहा है। जिला स्तर पर फंड का स्पष्ट फॉर्मूला और सरकारी निकायों में जल्द नियुक्तियां गठबंधन के घटक दलों के बीच असंतोष कम करने में मदद कर सकती हैं।
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर अगले 15 दिनों में सरकारी कॉर्पोरेशन के आवंटन पर रहेगी। इसके साथ ही जिला योजना समिति के फंड वितरण के नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद यह देखना होगा कि स्थानीय स्तर पर सहयोगी दलों के बीच विवाद कितने कम होते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के स्पष्ट निर्देशों के बाद महायुति नेतृत्व की कोशिश है कि सत्ता में शामिल तीनों दलों के बीच बेहतर समन्वय कायम रहे और स्थानीय मतभेद सरकार के कामकाज में बाधा न बनें।