मुंबई। देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में लगातार छात्र मौतों के बाद एक बार फिर कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। शुक्रवार को एक दूसरे वर्ष के छात्र की मौत के बाद शनिवार को 400 से ज्यादा छात्र प्रदर्शन के लिए जुटे। छात्रों ने प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक करने, जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले करीब सात महीनों में IIT बॉम्बे परिसर में यह तीसरी छात्र आत्महत्या की घटना है।
ताजा घटना 18 सितंबर की है। IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के 19 वर्षीय छात्र साहिल वाकोड़े की मौत हुई। संस्थान के अनुसार, उसी दिन परीक्षा के दौरान छात्र मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पाया गया था। IIT बॉम्बे ने कहा कि छात्र ने परीक्षा के प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की थी। इसके बाद शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने उससे बातचीत की और उसे समझाया गया था कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। संस्थान का कहना है कि छात्र के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। बाद में वह हॉस्टल लौट गया और शाम को अपने कमरे में मृत पाया गया।
घटना के बाद कैंपस में क्यों भड़का विरोध?
छात्र की मौत की जानकारी फैलने के बाद कैंपस में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने केवल ताजा घटना पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि इस साल हुई लगातार छात्र मौतों को लेकर संस्थान की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि उन्हें यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जा रहा कि इन घटनाओं के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और संस्थान उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। छात्रों ने डीन, निदेशक और प्रशासन से एक रिपोर्ट की मांग की, जिसमें घटनाओं की समीक्षा, जवाबदेही और भविष्य की रोकथाम को लेकर स्पष्ट जानकारी हो।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों की एक बड़ी मांग **पारदर्शिता और जवाबदेही** रही। छात्रों का कहना है कि गंभीर घटना के बाद केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है। वे यह जानना चाहते हैं कि प्रशासन की ओर से किन स्तरों पर समीक्षा की जा रही है और छात्रों की सुरक्षा तथा कल्याण के लिए क्या बदलाव किए जाएंगे।
सात महीने में तीन मौतें
ताजा घटना से पहले भी IIT बॉम्बे में इस साल दो छात्र मौतें सामने आ चुकी हैं। फरवरी में दूसरे वर्ष के छात्र नमन अग्रवाल की कैंपस में मौत हुई थी। उस समय पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी और यह जांच की जा रही थी कि घटना दुर्घटना थी या छात्र ने जानबूझकर ऐसा कदम उठाया था। पुलिस के अनुसार, छात्र के परिवार और दोस्तों से पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया था कि वह कैंपस में काउंसलिंग ले रहा था।
इसके बाद जुलाई में 20 वर्षीय दूसरे वर्ष के मटेरियल साइंस छात्र सोहिल राजकुमार सांगवान की हॉस्टल में मौत हुई। पुलिस ने उस मामले में भी जांच शुरू की थी। शुरुआती जांच में पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया गया था।
अब सितंबर में साहिल वाकोड़े की मौत के बाद छात्रों ने इन घटनाओं को एक बड़े कैंपस संकट के रूप में उठाया है। हालांकि, यह जरूरी है कि अलग-अलग घटनाओं के कारणों को जांच पूरी होने से पहले एक जैसा न माना जाए। फरवरी की घटना की परिस्थितियां और जुलाई की घटना की परिस्थितियां अलग थीं, जबकि ताजा मामले में परीक्षा से जुड़ी घटना का तत्काल संदर्भ सामने आया है। इसलिए किसी एक कारण को सभी मौतों की वजह बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।
परीक्षा और ChatGPT विवाद ने बढ़ाई चिंता
ताजा घटना में परीक्षा के दौरान मोबाइल और ChatGPT के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद अकादमिक अनुशासन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। संस्थान के आधिकारिक बयान के मुताबिक, छात्र के खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने उससे बातचीत की थी और उसे आश्वस्त किया था कि इस घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
दूसरी ओर, कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया कि छात्र को संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और एक साल के निलंबन को लेकर चिंता थी। यह दावा छात्रों की ओर से किया गया है, जबकि संस्थान का आधिकारिक पक्ष है कि कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी। इसलिए इस बिंदु पर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
400 से ज्यादा छात्र प्रदर्शन में शामिल
ताजा घटना के बाद 400 से ज्यादा छात्र कैंपस में एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रशासन से सीधे संवाद की मांग की। विरोध के बीच IIT बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे छात्रों से मिलने पहुंचे। इसके बाद बातचीत हुई और प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें सामने रखीं।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थान की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। छात्रों की चिंता यह भी है कि गंभीर घटनाओं के बाद कैंपस का सामान्य शैक्षणिक कामकाज उसी तरह जारी रहने से छात्रों में असंतोष पैदा होता है।
ताजा घटना के बाद चल रहे मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को भी स्थगित किया गया। इससे साफ है कि मामला केवल एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर संस्थान के सामान्य शैक्षणिक कार्यक्रम पर भी पड़ा है।
प्रशासन ने क्या कहा?
IIT बॉम्बे ने छात्र की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि संस्थान प्रभावित छात्रों, सहपाठियों, शिक्षकों और अन्य लोगों को आवश्यक सहयोग दे रहा है। प्रशासन ने यह भी कहा कि मौत से जुड़े हालात की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। संस्थान ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में मोबाइल और ChatGPT से जुड़े मामले में छात्र के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। इसलिए छात्र की मौत और परीक्षा में हुई घटना के बीच किसी निश्चित कारण या कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के नतीजों का इंतजार करना जरूरी है।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों में सबसे प्रमुख रूप से **जवाबदेही और पारदर्शिता** शामिल है। वे चाहते हैं कि प्रशासन पिछले मामलों की समीक्षा करे और यह बताए कि छात्रों की सुरक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए कौन से कदम उठाए जा रहे हैं।
छात्रों का एक वर्ग यह भी चाहता है कि शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों के छात्र व्यवहार से जुड़े तरीकों की समीक्षा की जाए। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने, छात्रों की शिकायतों को बेहतर तरीके से सुनने और कठिन परिस्थितियों में उन्हें संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने की मांग उठ रही है।
हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी छात्र प्रशासन को दोषी ठहराने के पक्ष में नहीं हैं। कुछ छात्रों ने कहा कि घटना के बाद किसी व्यक्ति पर तुरंत आरोप लगाने के बजाय पूरे कैंपस समुदाय को साथ खड़े होकर स्थिति को समझने और प्रभावित छात्रों की मदद करने की जरूरत है।
बड़ा सवाल: IIT बॉम्बे में क्या बदलेगा?
लगातार छात्र मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि संस्थान इन घटनाओं से क्या सीखता है और भविष्य में किस तरह के संस्थागत बदलाव किए जाते हैं। केवल काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध होना और छात्रों को सहायता का आश्वासन देना पर्याप्त है या नहीं, इस पर भी चर्चा हो रही है।
ताजा घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा संस्थानों में अकादमिक अनुशासन, परीक्षा नियम, मानसिक स्वास्थ्य और छात्रों पर दबाव के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। साथ ही AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल ने परीक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
फिलहाल साहिल वाकोड़े की मौत की परिस्थितियों की जांच जारी है। वहीं छात्र प्रशासन से ऐसी रिपोर्ट और ठोस कदम चाहते हैं, जिससे उन्हें यह भरोसा मिल सके कि पिछले मामलों से सबक लिया जा रहा है। सात महीने के भीतर तीन छात्र मौतों के बाद उठा यह विरोध अब केवल एक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि कैंपस में छात्र कल्याण, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा में बदल गया है।
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