मुंबई। मुंबई में इस साल मानसून के दौरान अच्छी बारिश के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सात जलाशयों में पानी का भंडार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को सातों जलाशयों में कुल पानी का स्टॉक 97.72 प्रतिशत दर्ज किया गया। एक दिन पहले भी जलाशयों में पानी का कुल स्तर 97.72 प्रतिशत ही था।

BMC के मुताबिक, सातों जलाशयों की कुल उपयोगी क्षमता 14,47,363 मिलियन लीटर (ML) है। इसके मुकाबले शनिवार को कुल लाइव स्टोरेज 14,14,356 मिलियन लीटर दर्ज किया गया। इस आंकड़े से मुंबई की मौजूदा जल भंडारण स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। शहर की दैनिक जलापूर्ति के लिए इन्हीं जलाशयों में जमा पानी महत्वपूर्ण स्रोत है।

मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाले सात प्रमुख जलाशयों में विहार, तुलसी, तानसा, मोदक सागर, मध्य वैतरणा, ऊपरी वैतरणा और भातसा शामिल हैं। इन जलाशयों में इस समय अधिकांश में पानी 89 प्रतिशत से अधिक है। इनमें विहार जलाशय पूरी तरह 100 प्रतिशत भरा हुआ है।

विहार जलाशय 100 प्रतिशत पर

BMC के आंकड़ों में विहार जलाशय का जलस्तर शनिवार को 100 प्रतिशत दर्ज किया गया। मुंबई के प्रमुख जलस्रोतों में शामिल विहार झील का पूरी क्षमता तक पहुंचना शहर की जल स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

वहीं भातसा जलाशय में 99.27 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया। भातसा मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यहां बड़ी मात्रा में पानी संग्रहित रहता है। जलाशय का मौजूदा स्तर लगभग पूरी क्षमता के करीब है।

तानसा में पानी का स्टॉक 99.02 प्रतिशत रहा। मध्य वैतरणा में 99.47 प्रतिशत और तुलसी जलाशय में 99.46 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया। यानी इन तीनों जलाशयों में भी जल भंडारण लगभग पूरी क्षमता तक पहुंच चुका है।

ऊपरी वैतरणा जलाशय में शनिवार को 94.90 प्रतिशत पानी था, जबकि मोदक सागर में जल भंडारण 89.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। सातों जलाशयों में मोदक सागर का प्रतिशत सबसे कम रहा, लेकिन यह भी 89 प्रतिशत से अधिक है।

एक दिन पहले भी 97.72 प्रतिशत था स्टॉक

BMC के ताजा आंकड़ों के अनुसार शनिवार को जलाशयों का कुल स्टॉक 97.72 प्रतिशत रहा। यही आंकड़ा शुक्रवार को भी दर्ज किया गया था। यानी एक दिन के अंतराल में कुल भंडारण प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बारिश का दौर कमजोर पड़ने या जलाशयों से नियमित आपूर्ति के कारण रोजाना जलस्तर में मामूली बदलाव हो सकता है। इसलिए BMC की ओर से जलाशयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाती है।

मुंबई जैसे महानगर के लिए जलाशयों में पर्याप्त पानी होना बेहद महत्वपूर्ण है। शहर में करोड़ों लीटर पानी की रोजाना जरूरत होती है और इसकी आपूर्ति मुख्य रूप से दूर स्थित जलाशयों तथा झीलों से होती है। मानसून के दौरान इन जलस्रोतों में पानी जमा किया जाता है, जिसे बाद में पूरे साल शहर की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

कुल क्षमता और लाइव स्टोरेज

BMC के अनुसार सातों जलाशयों की कुल उपयोगी क्षमता 14,47,363 ML है। इसके मुकाबले 14,14,356 ML लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया है। लाइव स्टोरेज से आशय जलाशय में उपलब्ध उस पानी से है जिसे उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि जलाशयों में उपलब्ध पानी उनकी कुल उपयोगी क्षमता के बेहद करीब है। हालांकि पानी का वास्तविक उपयोग केवल प्रतिशत के आधार पर तय नहीं होता। इसमें शहर की दैनिक खपत, आने वाले महीनों में बारिश, वाष्पीकरण और जलाशयों से छोड़े जाने वाले पानी जैसे कई कारक शामिल होते हैं।

मानसून के बाद राहत

मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था में मानसून का विशेष महत्व है। शहर में होने वाली बारिश का एक बड़ा हिस्सा जलाशयों के कैचमेंट क्षेत्रों में जाता है, जिससे झीलों और बांधों में पानी का स्तर बढ़ता है।

इस साल सात जलाशयों में पानी का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। विहार के 100 प्रतिशत और भातसा, तानसा, मध्य वैतरणा तथा तुलसी के 99 प्रतिशत के आसपास पहुंचने से जल भंडारण की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

हालांकि जलाशयों में पानी की मौजूदा स्थिति अच्छी होने के बावजूद BMC की ओर से जल प्रबंधन पर लगातार नजर रखना जरूरी है। मुंबई में पानी की मांग पूरे साल बनी रहती है। गर्मियों में मांग बढ़ने के साथ जलाशयों पर दबाव भी बढ़ता है।

सात जलाशयों की स्थिति

शनिवार के आंकड़ों के अनुसार:

विहार: 100 प्रतिशत

भातसा: 99.27 प्रतिशत

तानसा: 99.02 प्रतिशत

मध्य वैतरणा: 99.47 प्रतिशत

तुलसी: 99.46 प्रतिशत

ऊपरी वैतरणा: 94.90 प्रतिशत

मोदक सागर: 89.36 प्रतिशत

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पांच जलाशयों में पानी 99 प्रतिशत या उससे अधिक है। ऊपरी वैतरणा भी 95 प्रतिशत के करीब है, जबकि मोदक सागर में करीब 89 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।

पानी की उपलब्धता से बढ़ी राहत

मुंबई में पर्याप्त जल भंडारण होने से फिलहाल शहर की जलापूर्ति को लेकर राहत की स्थिति है। हालांकि जलाशयों में जमा पानी का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से करना जरूरी है, क्योंकि अगले मानसून तक इसी भंडार पर शहर की निर्भरता रहती है।

BMC रोजाना जलाशयों के जलस्तर की निगरानी करती है। इसी के आधार पर पानी की उपलब्धता, जलापूर्ति और भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाता है। जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की अपील भी की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी शहर की जल सुरक्षा केवल जलाशयों में भरे पानी से तय नहीं होती। जल वितरण नेटवर्क में होने वाली बर्बादी को कम करना, रिसाव पर नियंत्रण, वर्षा जल संचयन और पानी के पुन: उपयोग जैसी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं।

मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर कई बार जलाशयों में पानी तेजी से बढ़ता है। ऐसी स्थिति में बांधों से नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ना भी जरूरी होता है। इसके लिए जलाशयों के जलस्तर और मौसम के पूर्वानुमान की लगातार निगरानी की जाती है।

फिलहाल BMC के शनिवार के आंकड़े मुंबई के लिए अनुकूल जल भंडारण की तस्वीर पेश करते हैं। सातों जलाशयों में कुल 97.72 प्रतिशत पानी और 14,14,356 ML लाइव स्टोरेज दर्ज किया गया है। विहार पूरी क्षमता पर है, जबकि भातसा, तानसा, मध्य वैतरणा और तुलसी भी लगभग पूरी क्षमता के करीब हैं।

आने वाले महीनों में जलाशयों के स्तर में नियमित खपत के कारण कमी आएगी। ऐसे में BMC के लिए मौजूदा स्टॉक का संतुलित उपयोग और जलापूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मुंबई के प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

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