नासिक/इगतपुरी। इगतपुरी तालुका के शिरसाथे ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित सप्रेवाड़ी जिला परिषद प्राथमिक स्कूल की जर्जर हालत ने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्कूल की छह कोनों वाली हेक्सागोनल इमारत और किचन शेड लंबे समय से खराब स्थिति में हैं। भवन की छत से बारिश का पानी लगातार टपक रहा है, जबकि दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन समिति ने ग्राम पंचायत से तत्काल नई इमारत बनाने की मांग की है।
स्कूल प्रबंधन समिति के अनुसार, मौजूदा भवन की स्थिति ऐसी हो गई है कि किसी भी समय अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है। खासकर बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने और दीवारों में नमी बढ़ने के कारण भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
सरपंच ने किया स्कूल का निरीक्षण
स्कूल की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद शिरसाथे ग्राम पंचायत की सरपंच सुनीता दत्ता सदगीर ने स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान भवन की छत से पानी टपकने और दीवारों में मौजूद बड़ी दरारों को प्रत्यक्ष रूप से देखा गया। स्कूल प्रबंधन समिति ने पंचायत प्रतिनिधियों को भवन की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द से जल्द नए भवन का निर्माण कराने की मांग रखी।
समिति का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी आदिवासी समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन और स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
स्कूल भवन की सबसे बड़ी समस्या बारिश के दौरान सामने आती है। छत से पानी टपकने के कारण कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होती है। पानी के रिसाव से भवन की दीवारों में नमी भी बढ़ती है, जिससे पहले से मौजूद दरारों के और गंभीर होने की आशंका रहती है।
स्कूल प्रबंधन समिति का मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। भवन काफी जर्जर हो चुका है, इसलिए नई इमारत का निर्माण ही विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का बेहतर विकल्प है।
किचन शेड भी सुरक्षित नहीं
स्कूल का किचन शेड भी चिंता का एक बड़ा कारण बना हुआ है। यह शेड मुख्य रूप से नालीदार चादरों से घिरा हुआ है। पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत संरचना नहीं होने के कारण यहां अक्सर चूहे और बड़े चूहे यानी बैंडिकूट घुस आते हैं।
इनसे स्कूल में रखी दालों और अन्य खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचने की शिकायत है। इससे न केवल खाद्य सामग्री की बर्बादी होती है, बल्कि स्वच्छता और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति ने किचन के लिए भी सुरक्षित और पक्की संरचना की जरूरत पर जोर दिया है। समिति का कहना है कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और खाद्य सामग्री रखने की जगह साफ-सुथरी और सुरक्षित होनी चाहिए।
नई इमारत की मांग
स्कूल प्रबंधन समिति ने शिरसाथे ग्राम पंचायत से जर्जर भवन की जगह नई स्कूल इमारत बनाने की मांग की है। समिति का कहना है कि मौजूदा भवन की मरम्मत पर बार-बार खर्च करने के बजाय विद्यार्थियों की संख्या और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नया भवन तैयार किया जाना चाहिए।
नई इमारत बनने से बच्चों को सुरक्षित कक्षाएं मिलेंगी और बारिश के दौरान पढ़ाई बाधित होने की समस्या भी दूर हो सकेगी। साथ ही स्कूल में किचन के लिए भी बेहतर व्यवस्था की जा सकेगी।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा से जुड़ा मामला
सप्रेवाड़ी स्कूल केवल एक शैक्षणिक भवन नहीं, बल्कि आसपास के आदिवासी परिवारों के बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूल की सुविधाओं का बच्चों की पढ़ाई पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
यदि भवन की खराब स्थिति के कारण बच्चों को लगातार असुविधा होती है तो इसका असर उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन समिति ने इस मामले को केवल भवन मरम्मत की समस्या न मानते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
निरीक्षण के बाद अब स्थानीय स्तर पर स्कूल भवन की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई की उम्मीद है। पंचायत और संबंधित विभाग के स्तर पर भवन की तकनीकी स्थिति का आकलन कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।
स्कूल प्रबंधन समिति और ग्रामीणों की मांग है कि बारिश के दौरान किसी संभावित हादसे से पहले जर्जर भवन की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सप्रेवाड़ी के इस जिला परिषद प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बनी हुई है। छत से टपकता पानी, दीवारों में पड़ी बड़ी दरारें और असुरक्षित किचन शेड स्कूल की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े करते हैं। अब निगाहें ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासन पर हैं कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए नई इमारत और सुरक्षित किचन के लिए कितनी जल्दी ठोस कदम उठाए जाते हैं।