Maharashtra महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज लोहड़ी का पर्व बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सर्दियों के इस प्रमुख त्यौहार पर शहर के विभिन्न इलाकों में लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ इकट्ठा हुए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उत्सव मनाया। लोहड़ी का मुख्य आकर्षण आग जलाना और उसके चारों ओर इकट्ठा होकर पारंपरिक गीत और भांगड़ा करना होता है। मुंबई के कई मोहल्लों में लोग रात को आग के चारों ओर इकट्ठा हुए और तिल, मूंगफली, गुड़ और अन्य व्यंजन रखकर पूजा-अर्चना की। बच्चों ने भी भांगड़ा और लोकगीत में भाग लिया, जिससे उत्सव का माहौल और भी जीवंत बन गया।
स्थानीय निवासी और परिवारों ने अपने घरों में छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने कहा कि लोहड़ी का पर्व केवल सर्दियों का त्यौहार नहीं है, बल्कि सामाजिक मेलजोल, भाईचारा और खुशियों का प्रतीक भी है। युवा और बुजुर्ग दोनों ने पारंपरिक परिधान पहनकर इस पर्व का आनंद लिया। मुंबई के विभिन्न कम्युनिटी हॉल और खुले मैदानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में भांगड़ा, गिद्दा और अन्य लोक नृत्य प्रस्तुत किए गए। आयोजकों ने आग के पास सुरक्षा और सामाजिक दूरी के नियमों का पालन सुनिश्चित किया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि लोहड़ी के अवसर पर पारंपरिक व्यंजनों और गीतों के माध्यम से संस्कृति और परंपरा का अनुभव बच्चों और युवाओं तक पहुंचाना बहुत महत्वपूर्ण है। कई स्थानों पर लोग आग के चारों ओर इकट्ठा होकर गुड़ और तिल का भजन करते हुए दूसरों को शुभकामनाएं भी दे रहे थे। शहर में आयोजित कार्यक्रमों में सामूहिक उत्सव और पारिवारिक मिलन का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा। लोगों ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि सामाजिक मेलजोल और सामुदायिक भावना को भी मजबूत करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोहड़ी का पर्व विशेष रूप से सर्दियों के दौरान मनोबल बढ़ाने और खुशियों को साझा करने का अवसर है। मुंबई में यह पर्व विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों को जोड़ने का माध्यम भी बन रहा है। कुल मिलाकर, मुंबई में मनाई गई लोहड़ी ने सर्दियों की ठंड में गर्माहट, खुशी और उल्लास का संदेश फैलाया। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच उत्सव ने शहर के विभिन्न इलाकों में सांस्कृतिक और पारंपरिक जुड़ाव को बढ़ावा दिया। इस प्रकार का सामूहिक उत्सव न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी मजबूती देता है।
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