पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में खेल कोटे के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि खेल उपलब्धियों के नाम पर 1000 से ज्यादा नकली प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिनका इस्तेमाल सरकारी भर्तियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए किया गया। मामला सामने आने के बाद खेल प्रमाणपत्रों की सत्यता और भर्ती प्रक्रिया की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि कुछ खेल संगठनों से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर ऐसी प्रतियोगिताओं के रिकॉर्ड तैयार किए, जिनके आयोजन पर भी संदेह जताया जा रहा है।

कुराश खेल के नाम पर जारी हुए फर्जी सर्टिफिकेट
जांच के दौरान सबसे ज्यादा संदिग्ध प्रमाणपत्र कुराश खेल से जुड़े पाए गए हैं। आरोप है कि कई उम्मीदवारों को बिना वास्तविक प्रतियोगिता में भाग लिए राज्य और अन्य स्तर की प्रतियोगिताओं के प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर अभ्यर्थियों ने खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरियों में आवेदन किया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में महाराष्ट्र कुराश एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। इस मामले में एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को गिरफ्तार किया गया है।
सरकारी नौकरियों पर मंडराया खतरा
फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी हासिल करने वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां उम्मीदवारों ने खेल कोटे का लाभ लेकर सरकारी पद हासिल किए। अगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति पर भी कार्रवाई हो सकती है। अधिकारियों ने दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू कर दी है।
लाखों रुपये लेकर प्रमाणपत्र देने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के लिए उम्मीदवारों से लाखों रुपये वसूले जाने के आरोप हैं। कुछ मामलों में 3 से 5 लाख रुपये तक लेने की बात सामने आई है। आरोप है कि पूरे नेटवर्क के जरिए ऐसे युवाओं को खिलाड़ी साबित किया गया, जो वास्तव में संबंधित प्रतियोगिताओं में शामिल नहीं हुए थे।
पुलिस भर्ती में भी सामने आए मामले
पुणे पुलिस भर्ती प्रक्रिया में भी फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं। जांच में कुछ उम्मीदवारों द्वारा कुराश और ड्रैगन बोट जैसे खेलों के प्रमाणपत्र जमा करने की बात सामने आई, जिनकी सत्यता पर सवाल उठे हैं। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित विभाग अब पुराने रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोगों ने ऐसे प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर लाभ लिया।
खेल विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में अब खेल विभाग की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतियोगिताओं के आयोजन, प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया और सत्यापन व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल कोटे का उद्देश्य वास्तविक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अवसर देना है, लेकिन ऐसे फर्जीवाड़े से योग्य खिलाड़ियों के अधिकार प्रभावित होते हैं।
आगे और बड़े खुलासे की संभावना
जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही हैं। आशंका है कि आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं। पुणे के इस कथित खेल प्रमाणपत्र घोटाले ने सरकारी नौकरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।
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