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मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग अमेरिका के हमले से ईरान के 5 तेल टैंकर तबाह

nidhi
9 Sept 2026 6:26 AM IST
मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग अमेरिका के हमले से ईरान के 5 तेल टैंकर तबाह
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ईरान बौखलाया तेल टैंकरों पर हमले

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव ने अब समुद्री क्षेत्र और ऊर्जा बाजारों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है, जिसके बाद तेहरान ने कड़े जवाब की चेतावनी दी है।

अमेरिका की ओर से यह कार्रवाई ईरानी हमलों के जवाब में की गई बताई जा रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड
के अनुसार, ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद तेल टैंकरों पर हमला किया गया। अमेरिका का आरोप है कि ये टैंकर ईरान की सैन्य गतिविधियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क का हिस्सा थे।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रही तो वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों के खिलाफ बड़े कदम उठा सकता है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद जहाजों और ऊर्जा ठिकानों को लेकर भी चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और इसका जवाब दिया जाएगा। तेहरान ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में उसकी प्रतिक्रिया पहले से ज्यादा कड़ी हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार बढ़ती रही तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप, एशिया और भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।
तेल बाजार में हलचल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। निवेशक लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
क्या बढ़ सकता है संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चले आ रहे विवाद में अब समुद्री हमले, प्रतिबंध और सैन्य जवाबी कार्रवाई शामिल हो गई है। दोनों पक्ष पीछे हटने के बजाय अपनी ताकत दिखाने में लगे हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। मिडिल ईस्ट की यह नई जंग दुनिया के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। अगर तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तक दिखाई दे सकता है।
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