मुंबई। महाराष्ट्र में अभिनेता संजय दत्त के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। मामला मीरा-भायंदर के बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता और राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के बीच बयानबाजी तक पहुंच गया है। विवाद की शुरुआत मंत्री द्वारा आयोजित दही-हांडी कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां संजय दत्त ने कहा कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती।
कार्यक्रम में अभिनेता संजय दत्त की मौजूदगी और उनके मराठी बोलने को लेकर हुई बातचीत के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने इस मुद्दे पर मंत्री प्रताप सरनाइक की आलोचना करते हुए सवाल उठाए हैं।
दही-हांडी कार्यक्रम में हुआ घटनाक्रम
जानकारी के मुताबिक, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक की ओर से आयोजित दही-हांडी कार्यक्रम में अभिनेता संजय दत्त पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कथित तौर पर अभिनेता से मराठी में बोलने का आग्रह किया।
इसके बाद संजय दत्त ने मंच से लोगों का अभिवादन करते हुए कहा, “तुम्हा सर्वांना नमस्कार” यानी आप सभी को नमस्कार। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती।
संजय दत्त ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह पुणे की यरवदा जेल में छह साल रहे, लेकिन इसके बावजूद वह मराठी भाषा नहीं सीख पाए।
संजय दत्त के बयान पर उठे सवाल
संजय दत्त के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे सामान्य टिप्पणी बताया, जबकि कुछ नेताओं ने इसे मराठी भाषा और महाराष्ट्र की अस्मिता से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने इसी मुद्दे को लेकर मंत्री प्रताप सरनाइक पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक मराठी कार्यक्रम में किसी कलाकार से भाषा को लेकर इस तरह आग्रह करना कितना उचित है।
बीजेपी विधायक ने मंत्री को घेरा
नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया कि मंत्री को इस तरह का सवाल नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है, लेकिन किसी व्यक्ति को भाषा बोलने के लिए दबाव में नहीं लाया जाना चाहिए।
उन्होंने मंत्री के कार्यक्रम में हुए इस घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि मराठी भाषा का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर किसी को असहज महसूस नहीं कराया जाना चाहिए।
मंत्री समर्थकों का अलग नजरिया
वहीं, मंत्री प्रताप सरनाइक के समर्थकों का कहना है कि कार्यक्रम में मराठी भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही अभिनेता से मराठी में बोलने का अनुरोध किया गया था। उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।
समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को प्रोत्साहित करना गलत नहीं है। कार्यक्रम में संजय दत्त ने भी सम्मानपूर्वक मराठी में अभिवादन किया था।
मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र में संवेदनशीलता
महाराष्ट्र में मराठी भाषा का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। राज्य की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं।
कई राजनीतिक दल मराठी भाषा के संरक्षण और प्रचार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करते हैं। यही वजह है कि किसी सार्वजनिक मंच पर भाषा से जुड़ा बयान तुरंत राजनीतिक बहस का कारण बन जाता है।
संजय दत्त का महाराष्ट्र से पुराना रिश्ता
संजय दत्त का महाराष्ट्र और मुंबई से गहरा संबंध रहा है। उनका जन्म और पालन-पोषण मुंबई में हुआ है और वह लंबे समय से हिंदी फिल्म उद्योग का हिस्सा हैं।
हालांकि, उनके इस बयान कि वह मराठी नहीं सीख पाए, को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे उनकी व्यक्तिगत बात बताया तो कुछ ने इसे भाषा से जोड़कर देखा।
विवाद बढ़ने के संकेत
फिलहाल इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी विधायक की आलोचना के बाद अब मंत्री प्रताप सरनाइक और उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया पर नजर है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
फिलहाल विवाद का केंद्र संजय दत्त का बयान और उसके बाद नेताओं की प्रतिक्रिया बनी हुई है। जहां एक ओर भाषा के सम्मान की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक मंचों पर संवाद के तरीके को लेकर बहस छिड़ गई है।