नांदेड़ (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में व्यावसायिक मात्रा में गांजा तस्करी के मामले में स्पेशल NDPS कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बिलोली स्थित स्पेशल NDPS कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मंगलवार को दो आरोपियों गोकुल नारायण राजपूत और सुनील यादव महाजन को दोषी ठहराया।

यह मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल यूनिट द्वारा 1,127 किलोग्राम गांजा जब्त किए जाने से जुड़ा है। अदालत में अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर यह साबित किया कि दोनों आरोपी प्रतिबंधित पदार्थ की व्यावसायिक मात्रा के साथ पकड़े गए थे और वे अपने कब्जे को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

ट्रक से बरामद हुआ था 1127 किलो गांजा

मामला 15 नवंबर 2021 का है, जब NCB की टीम ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के नायगांव तालुका क्षेत्र में कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने मंजराम गांव के पास एक संदिग्ध ट्रक को रोका था।

ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। जांच के दौरान पता चला कि प्रतिबंधित मादक पदार्थ को 49 बोरियों में छिपाकर रखा गया था। इन बोरियों में कुल 1,127 किलोग्राम गांजा मिला।

NCB अधिकारियों ने मौके से गांजा, ट्रक और अन्य संबंधित सामग्री को कानून के अनुसार जब्त कर लिया था। इसके बाद मामले में आगे की जांच शुरू की गई।

ट्रक चालक और सह चालक गिरफ्तार

मामले में ट्रक चालक गोकुल नारायण राजपूत और सह चालक सुनील यादव महाजन को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने दोनों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत कार्रवाई की।

जांच के दौरान एजेंसी ने यह पता लगाने की कोशिश की कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे कहां पहुंचाया जाना था। इसके अलावा तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की गई।

अभियोजन पक्ष ने पेश किए सबूत

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए। इसमें जब्ती पंचनामा, बरामदगी से जुड़े दस्तावेज, जांच अधिकारियों के बयान और अन्य सामग्री शामिल थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी कि दोनों आरोपी प्रतिबंधित पदार्थ के कब्जे में थे और बरामदगी की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई थी।

अदालत ने मामले में पेश साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

व्यावसायिक मात्रा का मामला

NDPS कानून के तहत गांजे की बड़ी मात्रा को व्यावसायिक मात्रा की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी को कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

इस मामले में 1,127 किलोग्राम गांजे की बरामदगी को बेहद बड़ी मात्रा माना गया। अदालत ने माना कि यह मामला सामान्य स्तर की बरामदगी नहीं बल्कि संगठित तरीके से की जा रही मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ा था।

तस्करी नेटवर्क पर जांच जारी

मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में जांच एजेंसियां केवल बरामदगी तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास करती हैं।

NCB की मुंबई जोनल यूनिट भी इस मामले में यह पता लगाने में जुटी थी कि गांजे की खेप के पीछे कौन लोग शामिल थे और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।

NCB की कार्रवाई को मिली सफलता

NCB अधिकारियों के अनुसार, मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी और आरोपियों को दोषी ठहराया जाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

एजेंसी का उद्देश्य अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करना और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।

आगे सजा पर होगी सुनवाई

अदालत द्वारा दोनों आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। कोर्ट यह तय करेगा कि दोषियों को NDPS एक्ट के तहत कितनी सजा दी जाए।

1127 किलोग्राम गांजा तस्करी का यह मामला महाराष्ट्र में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर रहेगी।

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