महाराष्ट्र:  लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी ने एनसीपी संस्थापक शरद पवार और उनके परिवार से आरोपी सुनील गढ़वे के साथ संबंधों को लेकर सफाई देने की मांग की है।
बीजेपी का आरोप है कि पेपर लीक मामले में गिरफ्तार सुनील गढ़वे की कुछ राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं। महाराष्ट्र बीजेपी प्रवक्ता नवनाथ बान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाया कि आरोपी के नेताओं के साथ संपर्क किस स्तर का था और इस मामले में पूरी जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। आरोपों के बाद जांच शुरू हुई और मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में कार्रवाई करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया। इसमें एमपीएससी के कुछ अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं।
मामले की जांच के दौरान आरोप लगाया गया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ लोगों तक पहुंच गया था। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हुए। विपक्षी नेताओं ने सरकार से सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की। 
बीजेपी ने शरद पवार गुट को घेरा
बीजेपी ने इस मामले को लेकर शरद पवार गुट पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं ने आरोपी सुनील गढ़वे की तस्वीरें दिखाते हुए सवाल किया कि उसके राजनीतिक संबंध किन लोगों से थे।
बीजेपी का कहना है कि अगर किसी आरोपी के नेताओं के साथ संपर्क रहे हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए और संबंधित लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पार्टी ने शरद पवार और एनसीपी नेताओं से जवाब मांगा है।
रोहित पवार ने भी उठाए थे सवाल
वहीं दूसरी ओर शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार पहले से ही इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
रोहित पवार ने सरकार से मांग की थी कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। उनके आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
आरोपी के राजनीतिक कनेक्शन पर विवाद
पेपर लीक मामले में सबसे ज्यादा चर्चा आरोपी सुनील गढ़वे के कथित राजनीतिक संपर्कों को लेकर हो रही है। बीजेपी और विपक्ष दोनों अपने-अपने आरोप लगा रहे हैं।
बीजेपी जहां शरद पवार गुट से जवाब मांग रही है, वहीं विपक्षी नेता आरोप लगा रहे हैं कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच से बचने की कोशिश कर रही है।
हालांकि जांच एजेंसियां अभी मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और किसी भी राजनीतिक संबंध की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रों के भविष्य का मुद्दा
पेपर लीक जैसे मामलों से सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को होता है, जो महीनों और वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
महाराष्ट्र में भी हजारों उम्मीदवारों ने इस परीक्षा के लिए तैयारी की थी। परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद छात्रों में नाराजगी देखने को मिली।
छात्र संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था और कड़ी निगरानी जरूरी है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
पेपर लीक मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल MPSC पेपर लीक मामला जांच के दौर में है। पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपी लोगों से पूछताछ कर रही हैं और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेपर लीक की साजिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी।
जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल बीजेपी के आरोपों से महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है और शरद पवार गुट से जवाब की मांग तेज हो गई है।
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