मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कांग्रेस ने विशेष रूप से ड्राफ्ट मतदाता सूची में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं।राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, SIR से पहले महाराष्ट्र की मतदाता सूची में कुल **9,78,54,049 मतदाता** दर्ज थे। ड्राफ्ट मतदाता सूची में इनमें से **7,71,65,562 मतदाताओं** को शामिल किया गया है, जो पिछली सूची के करीब 78.86 प्रतिशत हैं। वहीं **2,06,88,487 मतदाता**, यानी करीब 21.14 प्रतिशत, ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए।
दो करोड़ से ज्यादा नामों पर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल क्यों नहीं हुए। पार्टी ने यह जानने की जरूरत बताई कि इन मतदाताओं की स्थिति क्या है और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया में उन्हें अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए कौन-कौन से विकल्प उपलब्ध हैं।हालांकि चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटा दिया गया है। इन मतदाताओं के नाम अलग-अलग कारणों से ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हुए हैं और दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाता अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
17 अगस्त तक 7.71 करोड़ फॉर्म जमा
SIR के एन्यूमरेशन चरण के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से मतदाताओं के फॉर्म एकत्र किए गए। 17 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 9.78 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से करीब 7.71 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म जमा और डिजिटाइज किए जा चुके थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं की जानकारी प्रक्रिया में शामिल हुई, जबकि कुछ मतदाताओं के फॉर्म विभिन्न कारणों से एकत्र नहीं हो सके।चुनाव अधिकारियों के मुताबिक फॉर्म एकत्र नहीं होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें मतदाता का पते पर मौजूद नहीं होना या पता नहीं चलना, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, मृत्यु हो जाना, दूसरी जगह पहले से पंजीकरण या डुप्लीकेट एंट्री जैसे मामले शामिल हैं।
ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का क्या मतलब?
चुनाव अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि 'अनकलेक्टेबल' या ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का प्रमाण नहीं है। ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद पात्र मतदाताओं को दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है।महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए ड्राफ्ट मतदाता सूची, दावे और आपत्तियों की जानकारी, ASDD यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची तथा नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
दावे और आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने वाले मतदाता दावा दाखिल करके अपना नाम शामिल कराने की मांग कर सकते हैं। चुनाव प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने, विवरण में सुधार और किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अलग-अलग फॉर्म निर्धारित हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर तक की अवधि निर्धारित की गई थी। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम बताया गया है।इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाता अंतिम सूची में शामिल हो सकें और गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।
किन कारणों से बाहर हुए नाम?
चुनाव अधिकारियों की ओर से जारी आंकड़ों में ड्राफ्ट सूची से बाहर रहे मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इनमें 'अब्सेंट/नॉट फाउंड', स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए मतदाता, मृत मतदाता, दूसरी जगह पहले से पंजीकृत या डुप्लीकेट नाम और अन्य मामले शामिल हैं।रिपोर्टों के अनुसार महाराष्ट्र के बड़े शहरी जिलों में ऐसे मतदाताओं की संख्या काफी अधिक रही। पुणे, ठाणे और मुंबई उपनगर उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आए।
कांग्रेस ने सुरक्षा उपायों का मुद्दा उठाया
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें दावा और आपत्ति प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त अवसर और जानकारी मिलनी चाहिए। पार्टी की चिंता यह है कि पात्र मतदाता प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में अपना दावा दाखिल करने से वंचित न रह जाएं।दूसरी ओर, चुनाव अधिकारियों की ओर से यह व्यवस्था बताई गई है कि मतदाता ड्राफ्ट सूची में अपना नाम जांच सकते हैं और नाम नहीं होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल कर सकते हैं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR से जुड़ी हेल्पलाइन **1950** और संबंधित जानकारी भी उपलब्ध है।
अंतिम सूची के बाद तस्वीर होगी साफ
फिलहाल ड्राफ्ट सूची में शामिल और बाहर रहे नामों का आंकड़ा अंतिम मतदाता सूची नहीं है। दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं और रिकॉर्ड में आवश्यक सुधार भी किया जा सकता है।इसलिए 2.06 करोड़ से अधिक नामों का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना चुनाव प्रक्रिया का अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दावे और आपत्तियों के बाद कितने नाम अंतिम सूची में शामिल होते हैं और कितने रिकॉर्ड में बदलाव किया जाता है।महाराष्ट्र में SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव अधिकारियों के बीच उठे सवालों के बीच मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम यही है कि वे अपनी स्थिति ड्राफ्ट सूची में जांचें और नाम नहीं मिलने पर निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा दाखिल करें। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद ही SIR के तहत हुए बदलाव की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
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