ग्रामीणों ने सड़क मरम्मत की मांग उठाई, वाहन चालक डामर से ज्यादा गड्ढों में जोखिम भरा सफर कर रहे
Raisen रायसेन। करोड़ रूपयों की लागत से प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी की महत्वाकांक्षी योजना सड़क परियोजना का अब मजाक उड़ने लगा है। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर डामर से ज्यादा गड्ढे उभर चुके हैं।और आए दिन यह गड्ढे नुमा जानलेवा सड़कें हादसों को न्यौता दे रही हैं। आलम यह है कि इनमें आए दिन वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं । ऐसी स्थिति में वही वाहन चालक जोखिम भरा सफर करने के लिए मजबूर है। सड़क समझ कर सरपट भागने की कोशिश अब जानलेवा साबित हो रही है। ग्रामीण इलाकों की सड़कों की हालत वैसी नहीं है जैसा लोग समझते हैं ।कारण साफ है गड्ढे में सड़क है या फिर सड़क में गड्ढे यह पता ही नहीं चलेगा। इनमें कई सड़कें तो डेंजर जोन के रूप में है।हालत यह है कि सड़कों पर सफर करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
इन सड़कों को है मरम्मत की दरकार....
जिला मुख्यालय रायसेन को जोड़ने वाली मऊ पथरई से सुंड सालेरा, खरगावली से डाबरा इमालिया, हकीमखेड़ी तौर अंधेर,अंडोल संग्रामपुर और कानपोहरा, करहोद की सड़कों के भी बुरेहाल है। इसी तरह तहसील गैरतगंज की गढ़ी से लेकर अगर यह तक और हिनोतिया से लेकर बांसदेही खेड़ा,खमरिया गढी तक सड़क मटियामेट हो चुकी है सड़क जगह गढ़ों में तब्दील हो गई है और गिट्टियां बिखर कर सड़कों पर फैल रही हैं। ग्रामीणों ने पीएम सड़क परियोजना के महाप्रबंधक आरएस तिवारी ,कलेक्टर अरुण विश्वकर्मा से सड़कों की मरम्मत की पुरजोर मांग की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा यदि सड़कों की मरम्मत जल्द नहीं कराई गई तो ग्रामीण सागर भोपाल गढ़ी मार्ग पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
सड़क गड्ढों में तब्दील, घटिया निर्माण का अच्छा उदाहरण....
तहसील रायसन सर्किल में डेढ़ करोड़ की लागत से नवंबर 2019 में सड़को पर हुआ था रिन्युअल कोट....
मिनी पंजाब कहे जाने वाले पैमत से महुआखेड़ा सुल्तानपुर गोला से सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई थी । इस पर रिन्युवल कोट कराया गया अब सफर आसान हो गया है। पैमत से ब्यावरा,बीदपुरा मेन रोड़ तक, नीमखेड़ा से लेकर रमपुरा केसरी तक,पेगवा सड़क की हालत यह है कि इस सड़क पर वाहन चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। पिछले साल ही पीएम सड़कों पर डामर का रिन्युअल कोड कराया गया था। निर्माण कार्य इतना घटिया किया गया कि बारिश से पहले ही सड़क उखड़ गई थी। डामरीकरण रिन्युअल कोड कराया गया था। लेकिन 6 महीने में ही जगह-जगह से यह रिन्युअत कोड उखड़ गया और सड़क पर गड्ढे उभर आए। बारिश होते ही सड़क की हालत और ज्यादा खराब हो गई। घटिया निर्माण के कारण उखड़ा डामर का रिन्युअल कोड । सड़कों पर डामर के लेप से रिन्युवल कोट कराया गया है ।वह बेहद घटिया है। इसका इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि बारिश के पहले ही जगह-जगह सड़क उखड़ गई थी। अब जिम्मेदार विभाग के अफसर यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि कार्य ठेकेदार द्वारा किया गया है। उसकी 3 साल की गारंटी है। वही मरम्मत करेगा लेकिन जैसे ही मरम्मत होगी महीने भर बाद हालत जस की तस हो जाएगी।
इनका कहना है....
सड़कों में पेंचवर्क कराए जाने के लिए प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए वरिष्ठ कार्यालय भोपाल भेजा जाएगा। बजट मंजूर हो जाने के बाद जल्दी इन सड़कों के गड्ढों के घाव भरे जाएंगे। चिंता की कोई बात नहीं है। आर एस तिवारी पीएम सड़क परियोजना महाप्रबंधक रायसेन