इंदौर : मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) के कर्मचारी शिवराम सेमिल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब लोकायुक्त ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को पत्र भेजकर आरोपी कर्मचारी के शेयर मार्केट निवेश, म्यूचुअल फंड, डीमैट अकाउंट और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अपनी आय से अधिक संपत्ति किस तरह से अर्जित की और उसका निवेश कहां-कहां किया गया।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में शिवराम सेमिल के पास से 17 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति सामने आ चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय की तुलना में करीब 750 प्रतिशत अधिक है। इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति मिलने के बाद लोकायुक्त ने वित्तीय स्रोतों की गहन जांच शुरू कर दी है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी कर्मचारी की संपत्तियों में जमीन, मकान, बैंक जमा, निवेश और अन्य आर्थिक साधनों की जानकारी जुटाई जा रही है। इसी क्रम में SEBI से शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से जुड़े निवेश का रिकॉर्ड मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी ने कितनी रकम निवेश की और उसका स्रोत क्या था।
इसके अलावा लोकायुक्त ने आयकर विभाग और संबंधित सरकारी विभागों से भी शिवराम सेमिल के सेवा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज मांगे हैं। जांच एजेंसी आरोपी की पूरी नौकरी अवधि के दौरान प्राप्त वेतन, भत्ते, अन्य आय और खर्चों का मिलान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आय और संपत्ति के बीच अंतर का सही आकलन करने के लिए सभी दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
लोकायुक्त पुलिस के डीएसपी सुनील तालान ने बताया कि आरोपी के प्राथमिक बैंक खातों की जानकारी जांच एजेंसी को मिल चुकी है। अब बैंक खातों में हुए बड़े लेन-देन, जमा राशि और खर्चों की जांच की जा रही है। इसके साथ ही शासकीय सेवा रिकॉर्ड मिलने के बाद आरोपी की कुल वैध आय और खर्चों का अंतिम आकलन किया जाएगा।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, शिवराम सेमिल की पूरी सेवा अवधि की वैध आय करीब 2 करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित की गई है। वहीं, जांच में सामने आई संपत्ति इससे कई गुना अधिक है। इसी आधार पर लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है।
लोकायुक्त अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आरोपी ने संपत्ति अपने नाम पर खरीदी या किसी अन्य माध्यम से निवेश किया। इसके लिए बैंक खातों, संपत्ति दस्तावेजों और वित्तीय संस्थानों से मिली जानकारी को आपस में मिलाया जाएगा।
जांच पूरी होने के बाद लोकायुक्त पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि वित्तीय निवेश और संपत्तियों का स्रोत संतोषजनक नहीं पाया गया तो आरोपी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अधिनियम के तहत कार्रवाई और तेज की जा सकती है। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।