विदिशा के विभोर बनाएंगे नेविगेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में रचेगा नया इतिहास
विदिशा से अंतरिक्ष तक सफर विभोर तैयार कर रहे स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम
विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा के रहने वाले युवा इंजीनियर और अंतरिक्ष उद्यमी विभोर जैन देश की अंतरिक्ष तकनीक को नई दिशा देने की तैयारी में जुटे हैं। विभोर अपनी कंपनी के जरिए ऐसा नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जो भविष्य में रक्षा, ड्रोन, दूरसंचार और स्वचालित तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभोर जैन की कंपनी पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में आधारित उपग्रह प्रणाली विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य सटीक स्थिति निर्धारण, मार्गदर्शन और समय निर्धारण सेवाएं उपलब्ध कराना है। कंपनी की योजना वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही में अपना पहला सैटेलाइट लॉन्च करने की है।
पीएम मोदी और अजीत डोभाल के सामने दिया प्रेजेंटेशन
विभोर जैन ने अपने स्पेस प्रोजेक्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के सामने प्रेजेंटेशन भी दिया है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में काम कर रहे स्टार्टअप्स के प्रयासों की सराहना की। विभोर का लक्ष्य एक ऐसा वैश्विक उपग्रह समूह तैयार करना है, जो आधुनिक तकनीकों के लिए सुरक्षित और सटीक नेविगेशन सुविधा उपलब्ध करा सके। यह प्रणाली रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ ड्रोन, विमान और अन्य स्वचालित प्रणालियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
ड्रोन तकनीक से शुरू हुआ सफर
विभोर जैन की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत ड्रोन तकनीक से हुई। आईआईटी के बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ ड्रोन सिस्टम पर काम किया और करीब 55 से 60 ड्रोन विकसित किए। काम के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बड़ी संख्या में ड्रोन को नियंत्रित करने के लिए केवल हार्डवेयर ही नहीं बल्कि बेहद सटीक लोकेशन और टाइमिंग सिस्टम की भी जरूरत होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने सैटेलाइट आधारित नेविगेशन तकनीक पर काम शुरू किया। उनकी टीम अब उपग्रहों की सटीक कक्षा निर्धारण प्रणाली, आपसी संचार व्यवस्था और परमाणु घड़ी जैसी उन्नत तकनीकों पर काम कर रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक
आज दुनिया में नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल मोबाइल फोन, वाहन, ड्रोन, विमान और रक्षा उपकरणों तक में किया जाता है। ऐसे में स्वदेशी और सुरक्षित नेविगेशन तकनीक किसी भी देश की रणनीतिक ताकत को बढ़ाती है। भारत पहले ही अपना क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC विकसित कर चुका है। अब निजी स्पेस कंपनियों की भागीदारी से देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई संभावनाएं बढ़ रही हैं।
विदिशा से अंतरिक्ष तक का सफर
विभोर जैन की सफलता मध्य प्रदेश के छोटे शहरों से निकलकर बड़े वैज्ञानिक सपने पूरे करने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। उन्होंने दिखाया है कि सही सोच, तकनीकी ज्ञान और मेहनत के दम पर भारत में रहकर भी अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। देश में निजी स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे स्टार्टअप भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर विभोर जैन के इस महत्वाकांक्षी मिशन पर है। अगर उनका सैटेलाइट मिशन सफल होता है तो यह भारत की स्वदेशी नेविगेशन क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।