मध्य प्रदेश : ग्रीन ट्रांजिट के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों और तकनीक आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण हो रहा है और उनकी आपूर्ति दुनिया के विभिन्न हिस्सों में की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि इस औद्योगिक विकास का लाभ प्रदेश को भी मिले। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री की घोषणा में वाहन निर्माण और स्थानीय परिवहन की जरूरतों को जोड़ने पर विशेष ध्यान है। उनका कहना है कि प्रदेश में तैयार हो रहे इलेक्ट्रिक वाहनों से राज्य के लोगों को भी लाभ मिलना चाहिए। सरकार सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में तकनीक आधारित समाधान शामिल करना चाहती है। इस दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ यात्रियों की सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच बेहतर करने की योजना सामने रखी गई है। फिलहाल घोषणा नीति की दिशा और प्रस्तावित प्रयासों से संबंधित है।

सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बाइक टैक्सी कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य यात्रा के शुरुआती और अंतिम हिस्से की कनेक्टिविटी बेहतर करना है। इन दोनों हिस्सों को परिवहन क्षेत्र में ‘फर्स्ट-माइल’ और ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी कहा जाता है। समझौते के जरिए लोगों को मुख्य सार्वजनिक परिवहन सेवा तक पहुंचने और उससे उतरने के बाद अपने गंतव्य तक जाने में सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है।

इस व्यवस्था को रोजमर्रा की यात्रा के उदाहरण से समझा जा सकता है। किसी यात्री को घर से बस स्टॉप तक पहुंचना पड़ता है और बस से उतरने के बाद कार्यालय, बाजार या दूसरे गंतव्य तक जाना होता है। यात्रा के ये छोटे हिस्से भी सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने के निर्णय को प्रभावित करते हैं। बाइक टैक्सी जैसी सेवा इन दूरी वाले हिस्सों के लिए विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हालांकि, सेवा की वास्तविक उपयोगिता उसकी उपलब्धता, संचालन और यात्रियों की जरूरतों पर निर्भर करेगी।

तकनीक आधारित परिवहन समाधानों को शामिल करने की योजना इसी व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क लोगों की यात्रा जरूरतों से बेहतर तरीके से जुड़े। मुख्य परिवहन सेवा और छोटे संपर्क मार्गों के बीच समन्वय होने से यात्रा की प्रक्रिया आसान बन सकती है। मुख्यमंत्री की घोषणा में तकनीक को इस व्यवस्था में शामिल करने पर जोर है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी विशेष डिजिटल प्रणाली, आवेदन प्रक्रिया या यात्री सुविधा की शुरुआत का विस्तृत कार्यक्रम नहीं दिया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का निर्णय प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के उपयोग से भी जुड़ा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्य प्रदेश में तैयार वाहन विभिन्न देशों और क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। यह उनके संबोधन में किया गया दावा है। उपलब्ध जानकारी में कंपनियों की सूची, उत्पादन की कुल संख्या या निर्यात के अलग-अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इसलिए घोषणा का प्रमुख संदेश राज्य में निर्माण और राज्य के भीतर उपयोग के बीच संबंध मजबूत करना है, जिसकी प्रगति आगे के कदमों से स्पष्ट होगी।

प्रदेश को वैश्विक ग्रीन ट्रांजिट हब बनाने का लक्ष्य दीर्घकालीन दिशा प्रस्तुत करता है। इसे हासिल करने के लिए वाहन निर्माण के साथ परिवहन सेवाओं का संचालन महत्वपूर्ण रहेगा। इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध होने और लोगों द्वारा उनका नियमित उपयोग करने के बीच सुविधाओं की भूमिका होती है। सार्वजनिक परिवहन से जुड़े समाधानों को यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाना आवश्यक होगा। अभी इस लक्ष्य को हासिल करने की कोई निश्चित समयसीमा या पूरे राज्य के लिए चरणवार कार्यक्रम उपलब्ध विवरण में नहीं बताया गया है।

बाइक टैक्सी कंपनी के साथ हुआ समझौता इस दिशा में एक संस्थागत कदम है। समझौता ज्ञापन संबंधित पक्षों के बीच सहयोग की रूपरेखा देता है। लेकिन उसके हस्ताक्षर होने को सभी शहरों में सेवा तत्काल शुरू हो जाने के समान नहीं माना जा सकता। किन क्षेत्रों में व्यवस्था लागू होगी, उसका संचालन किस स्तर पर होगा और यात्रियों को कब सुविधा मिलेगी, जैसे प्रश्न क्रियान्वयन से जुड़े हैं। इनका स्पष्ट विवरण सामने आने के बाद समझौते के व्यावहारिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री की योजना में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने का उद्देश्य विशेष महत्व रखता है। किसी परिवहन नेटवर्क की उपयोगिता केवल मुख्य मार्ग पर चलने वाले वाहनों से निर्धारित नहीं होती। यात्रियों के लिए उस सेवा तक पहुंचना भी जरूरी होता है। शुरुआती और अंतिम दूरी के विकल्प उपलब्ध होने से मुख्य सेवा का इस्तेमाल आसान हो सकता है। इसी कारण बाइक टैक्सी समझौते को सार्वजनिक परिवहन के पूरक विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। उसका परिणाम स्थानीय जरूरतों के अनुरूप संचालन पर निर्भर रहेगा।

फिलहाल सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने और तकनीक आधारित परिवहन समाधान अपनाने की दिशा स्पष्ट की है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बेहतर करने के लिए समझौता किया गया है। आगे संचालन संबंधी विवरण और वास्तविक सुविधाएं इस पहल की प्रगति बताएंगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की निर्माण क्षमता का लाभ स्थानीय परिवहन को देने का लक्ष्य रखा है। अब इस घोषणा को यात्रियों के लिए उपयोगी व्यवस्था में बदलने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

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