इंदौर। ओणम के पावन अवसर पर शहर के पलाश रेजीडेंसी स्थित ‘सदर्न स्पाइसेस’ रेस्टोरेंट में दक्षिण भारतीय संस्कृति और परंपरा की खूबसूरत झलक देखने को मिली। बुधवार को रेस्टोरेंट को ताजे केले के पत्तों और रंग-बिरंगे फूलों से तैयार की गई आकर्षक रंगोली से सजाया गया। पूरे परिसर में त्योहार का उत्साह और पारंपरिक माहौल दिखाई दिया।

ओणम उत्सव के दौरान रेस्टोरेंट में आने वाले मेहमानों का स्वागत खास अंदाज में किया गया। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक दक्षिण भारतीय परिधान पहने कर्मचारियों ने किया। इसके साथ ही मेहमानों को परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया गया। इस आयोजन के जरिए लोगों को केरल की संस्कृति, खान-पान और त्योहार की परंपराओं से रूबरू कराया गया।

इस अवसर पर रेस्टोरेंट में विशेष फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें दक्षिण भारत के पारंपरिक व्यंजनों की लंबी श्रृंखला पेश की गई। केले के पत्तों पर परोसे गए इन व्यंजनों में 20 से अधिक पारंपरिक पकवान शामिल थे। फूड फेस्टिवल में शहर के बड़ी संख्या में लोग और खाने के शौकीन पहुंचे और दक्षिण भारतीय स्वाद का आनंद लिया।

ओणम के मौके पर तैयार किए गए विशेष भोजन में पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों को प्राथमिकता दी गई। केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा को भी विशेष रूप से शामिल किया गया, जिससे मेहमानों को केरल की संस्कृति का वास्तविक अनुभव मिल सके।

आयोजन के दौरान लोगों ने न केवल स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया, बल्कि दक्षिण भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को भी करीब से महसूस किया। रेस्टोरेंट में सजावट से लेकर भोजन परोसने तक हर व्यवस्था में दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई दी।

मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के जनरल मैनेजर विपिन कटारे ने बताया कि ‘सदर्न स्पाइसेस’ में तैयार किए जाने वाले व्यंजनों में गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि यहां इस्तेमाल होने वाले असली दक्षिण भारतीय मसाले सीधे केरल और कोयंबटूर से मंगाए जाते हैं, ताकि ग्राहकों को पारंपरिक स्वाद का अनुभव मिल सके।

उन्होंने बताया कि दक्षिण भारतीय भोजन की खासियत उसके मसालों और बनाने की पारंपरिक शैली में होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेस्टोरेंट में विशेष मसालों का उपयोग किया जाता है। इससे व्यंजनों में दक्षिण भारत जैसा वास्तविक स्वाद बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।

विपिन कटारे ने यह भी बताया कि रेस्टोरेंट में परोसी जाने वाली कॉफी भी खास होती है। इसके लिए कोयंबटूर से विशेष रूप से कॉफी बीन्स मंगाई जाती हैं। इन बीन्स से तैयार कॉफी मेहमानों को दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कॉफी संस्कृति का स्वाद देती है।

फूड फेस्टिवल में पहुंचे लोगों ने आयोजन की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन शहर में अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और खान-पान को समझने का अवसर देते हैं। खासतौर पर त्योहारों के मौके पर ऐसे कार्यक्रम लोगों को परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं।

ओणम केरल का प्रमुख त्योहार है, जिसे फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दौरान विशेष भोजन तैयार करने और लोगों के साथ मिलकर खुशियां बांटने की परंपरा है। सदर्न स्पाइसेस में आयोजित फूड फेस्टिवल के जरिए इसी परंपरा को शहर के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

आयोजकों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और खान-पान से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों की परंपराओं और स्वाद से परिचित कराया जा सके।

Tags: