खजुराहो। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के पास विकसित किए जा रहे महत्वाकांक्षी ‘विरासत वन’ (हेरिटेज फॉरेस्ट) प्रोजेक्ट पर अब अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का काम फंड की कमी के कारण प्रभावित हो गया है। बजट नहीं मिलने से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और रखरखाव व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है।
विरासत वन परियोजना को खजुराहो क्षेत्र में एक ग्रीन ज़ोन और जैव विविधता केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण से जोड़ना, स्थानीय वनस्पतियों का संरक्षण करना और क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना था।
लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। नए बजट के अभाव में निर्माण गतिविधियां धीमी हो गई हैं और पहले से किए गए कार्यों के रखरखाव में भी परेशानी आ रही है।
पौधों पर मंडरा रहा खतरा
प्रोजेक्ट के तहत बड़ी संख्या में पौधरोपण किया गया था। हालांकि, नियमित देखभाल और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण कई पौधों के सूखने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो लगाए गए पौधों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके अलावा परियोजना क्षेत्र में बनाई जा रही बाउंड्री वॉल, रास्ते और अन्य आधारभूत ढांचे का काम भी अधूरा है। लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहने से इन संरचनाओं पर मौसम का असर पड़ रहा है और इनके खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
पर्यावरण संरक्षण की पहल को झटका
विरासत वन को खजुराहो के पर्यटन विकास से जोड़कर देखा जा रहा था। योजना थी कि यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए एक आकर्षण केंद्र बनेगा, जहां लोग प्राकृतिक वातावरण, स्थानीय पेड़-पौधों और जैव विविधता को करीब से समझ सकेंगे।
परियोजना के रुकने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खजुराहो पहले से ही विश्व स्तर पर अपनी ऐतिहासिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में विरासत वन जैसी परियोजनाएं क्षेत्र के पर्यटन को और मजबूत कर सकती हैं।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंता
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द फंड जारी करने और रुके हुए कार्यों को दोबारा शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इस परियोजना पर वर्षों की मेहनत और संसाधन लगाए गए हैं, ऐसे में लापरवाही के कारण यह प्रयास बेकार नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते बजट उपलब्ध नहीं कराया गया तो परियोजना से जुड़ी संपत्तियों और पौधों को बड़ा नुकसान हो सकता है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को भी झटका लग सकता है।
प्रशासन से उम्मीद
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालेंगे। उनका कहना है कि विरासत वन केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी हरित परियोजना की सफलता के लिए निर्माण के साथ-साथ लंबे समय तक रखरखाव और देखभाल जरूरी होती है। यदि शुरुआती चरण के बाद बजट की कमी आ जाती है तो परियोजना के मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल, विरासत वन परियोजना के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सभी की नजर प्रशासन की ओर है कि कब तक इसके लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाती है और रुके हुए काम को दोबारा गति मिलती है।
यदि समय पर कदम उठाए जाते हैं तो यह परियोजना खजुराहो क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।