जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर और आसपास के कैचमेंट क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के चलते बरगी बांध से पानी छोड़ा गया है। मंगलवार को बांध के नौ गेट खोल दिए गए, जिसके बाद नर्मदा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, बरगी बांध के गेट औसतन 0.78 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों से लगभग 1,031 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड (क्यूमेक) पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर करीब 3 से 4 फीट तक बढ़ने की संभावना जताई गई है।

बरगी बांध से पानी छोड़े जाने का असर नर्मदा नदी के किनारे बसे कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। प्रशासन ने नदी के घाटों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

जबलपुर के प्रमुख घाटों जैसे ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, जिलाहरी घाट, भेड़ाघाट और धुआंधार क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा नरसिंहपुर और नर्मदापुरम जिले के नदी किनारे वाले क्षेत्रों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है।

प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रहें। खासकर बारिश के दौरान घाटों और निचले इलाकों में जाने से खतरा बढ़ सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि बांध क्षेत्र और नदी के आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है। राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

बरगी बांध मध्य प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में शामिल है। इसमें बारिश के मौसम में पानी का स्तर बढ़ने पर नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ा जाता है। बांध प्रबंधन द्वारा जलस्तर, बारिश और कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गेट खोलने का फैसला लिया जाता है।

इस बार जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ी है। इसी को देखते हुए बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पानी छोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित तरीके से की जा रही है।

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है और इसके किनारे बड़ी संख्या में धार्मिक और पर्यटन स्थल स्थित हैं। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरती जाती है।

भेड़ाघाट और धुआंधार जैसे पर्यटन स्थलों पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में लोगों को जागरूक करें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दलों को तैयार रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का प्रवाह अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

फिलहाल बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के बाद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की स्थिति में प्रशासन आगे भी बांध के जलस्तर और गेटों की स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

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