अगस्त में भी सूखा सूखा मौसम कई जिलों में बारिश की कमी

Update: 2026-08-09 16:14 GMT
मध्यप्रदेश :  अगस्त का महीना शुरू होने के बावजूद मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई है। प्रदेश के कई हिस्सों में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में मध्यप्रदेश में करीब 19 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्यप्रदेश में करीब 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसका असर खास तौर पर इंदौर संभाग के कई जिलों में दिखाई दे रहा है, जहां बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाला सप्ताह इंदौर और आसपास के जिलों के लिए लगातार झमाझम बारिश वाला नहीं रहने की संभावना है। फिलहाल कोई ऐसा मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं है, जिसके कारण पूरे इंदौर संभाग में व्यापक और लगातार बारिश हो सके। हालांकि सप्ताह के मध्य में उज्जैन और आलीराजपुर सहित कुछ इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। ऐसे में इन जिलों के लोगों और किसानों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर बनी हुई है।
इंदौर जिले में भी मानसून की स्थिति अब तक संतोषजनक नहीं रही है। जिले में सामान्य के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इंदौर शहर में इस मानसून सीजन में अब तक लगभग 400 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो औसत से करीब 133.2 मिलीमीटर कम है। हालांकि जिले की अलग-अलग तहसीलों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है। गौतमपुरा में करीब 738.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि महू, सांवेर, देपालपुर और हातोद में बारिश का आंकड़ा अलग-अलग रहा है। देपालपुर में करीब 501.1 मिलीमीटर और सांवेर में 414.4 मिलीमीटर बारिश हुई है।
इंदौर संभाग में कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। बुरहानपुर में अब तक करीब 586.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से लगभग 37 प्रतिशत अधिक है। खरगोन में करीब 464.9 मिलीमीटर और देवास में 565.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। वहीं दूसरी ओर आलीराजपुर, शाजापुर और धार जैसे जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर में अब तक लगभग 286.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम है। शाजापुर में करीब 324 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है और यहां कमी लगभग 39 प्रतिशत है। धार में भी सामान्य से करीब 31 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
उज्जैन जिले में भी मानसून की कमी बनी हुई है। यहां अब तक करीब 414.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 21 प्रतिशत कम है। हालांकि मौसम विभाग ने सप्ताह के मध्य में उज्जैन में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो जिले में बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कई मौसम प्रणालियों का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा मानसून द्रोणिका बीकानेर और ग्वालियर होते हुए कम दबाव वाले क्षेत्र से पुरी और पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। अफगानिस्तान के आसपास पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-मध्य महाराष्ट्र के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवात भी सक्रिय है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण फिलहाल पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश का जोर पश्चिमी हिस्से की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है।
शनिवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई। पूर्वी मध्यप्रदेश के डिंडोरी, अनूपपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट और मंडला में भारी से अति भारी वर्षा हुई। वहीं पश्चिमी मध्यप्रदेश में रायसेन, विदिशा और गुना में भी तेज बारिश दर्ज की गई। इससे साफ है कि प्रदेश में मानसून का असर फिलहाल अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग बना हुआ है।
बारिश की कमी का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ सकता है। मध्यप्रदेश के कई किसान खरीफ फसलों के लिए मानसून पर निर्भर हैं। जिन जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, वहां आने वाले दिनों की बारिश फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक पूरे प्रदेश में लगातार झमाझम बारिश के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है।
ऐसे में इंदौर, उज्जैन, आलीराजपुर, धार और शाजापुर समेत बारिश की कमी वाले जिलों में अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि सप्ताह के मध्य में अपेक्षित बारिश होती है तो मानसून की कमी कुछ कम हो सकती है, लेकिन व्यापक बारिश के लिए फिलहाल किसी मजबूत सिस्टम का इंतजार करना पड़ सकता है।
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