इंदौर : कांग्रेस सांसद और पार्टी के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने शुक्रवार को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। खेड़ा ने केंद्र में सत्तारूढ़ व्यवस्था को “संविधान-विरोधी” बताते हुए दावा किया कि मतदाताओं के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं, जिन पर राजनीतिक विवाद जारी है।चुनाव आयोग से जुड़े मौजूदा विवाद पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए खेड़ा ने संविधान और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के सिद्धांत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं और विशेष रूप से डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना की थी, जिसमें प्रत्येक मतदाता के वोट का समान महत्व हो।
खेड़ा ने कहा कि सामाजिक या आर्थिक स्थिति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन लोकतंत्र में हर नागरिक के वोट की कीमत समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में मतदाताओं को कथित तौर पर “VIP” और “आम नागरिक” जैसे अलग-अलग वर्गों में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसी आधार पर SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है।दिल्ली में SIR को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की खबरें सामने आईं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 19 सितंबर को इस विषय पर एक प्रेस नोट जारी किया गया था, जिसमें मतदाताओं, जिनमें VIP भी शामिल थे, को नोटिस जारी किए जाने से जुड़ी मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण दिया गया। CEO दिल्ली की वेबसाइट पर SIR से संबंधित कई अन्य आधिकारिक प्रेस नोट भी उपलब्ध हैं।
कांग्रेस पिछले कुछ दिनों से SIR को लेकर लगातार चुनाव आयोग पर निशाना साध रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने इसे नागरिकों के मतदान अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की है। 20 सितंबर को भी पार्टी ने SIR को लेकर बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाए जाने का आरोप लगाया था।हालांकि SIR की वैधता को लेकर न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ओर से प्रकाशित मामले के सारांश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि SIR अपने-आप में मतदाता पर अनुचित रूप से प्रमाण का भार डालता है। अदालत ने माना कि मतदाता सूची में पहले से दर्ज नाम को हमेशा के लिए जांच से परे नहीं माना जा सकता और नोटिस तथा सुनवाई जैसे सुरक्षा उपाय प्रक्रिया में मौजूद हैं।
इसी राजनीतिक और कानूनी पृष्ठभूमि में खेड़ा ने शुक्रवार को सरकार और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने डॉ. अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद मताधिकार की समानता पर आधारित है। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति के पद, प्रभाव या सामाजिक स्थिति के आधार पर मतदाता के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। पार्टी SIR के तहत अपनाई गई प्रक्रियाओं और मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिस को लेकर लगातार सवाल उठा रही है।वहीं चुनाव आयोग और उससे जुड़े अधिकारियों ने SIR को मतदाता सूची को अद्यतन और सही बनाए रखने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जून से सितंबर 2026 के बीच SIR से संबंधित कई प्रेस विज्ञप्तियां और नोट जारी किए गए हैं। इनमें घर-घर सत्यापन, मतदान केंद्रों के युक्तिकरण, ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन और मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।
SIR का मुद्दा अब कांग्रेस और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए SIR प्रक्रिया को कानूनी रूप से सही बताया है। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया और विपक्ष के दावों पर सवाल उठाए।एक दिन पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। भाजपा ने पलटवार करते हुए इन आरोपों को खारिज किया और कांग्रेस से उसके दावों के प्रमाण पर सवाल किया।
इस बीच कांग्रेस ने SIR के मुद्दे को सड़क पर भी उठाना शुरू कर दिया है। पार्टी और उसके युवा संगठन की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि वह मतदाता सूची और मतदान अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर अपना अभियान जारी रखेगी।पवन खेड़ा का शुक्रवार का बयान इसी राजनीतिक अभियान की अगली कड़ी है। उन्होंने संविधान निर्माताओं की ओर से स्थापित समान मताधिकार के सिद्धांत को केंद्र में रखते हुए SIR पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव अधिकारियों के आधिकारिक स्पष्टीकरण और सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।