इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर गुरुवार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने में अधिकारियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। याचिकाकर्ता ने इस मामले में न्यायालय से हस्तक्षेप कर उचित दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

यह जनहित याचिका इंदौर निवासी सोशल एक्टिविस्ट और अधिवक्ता अभिजीत पांडे की ओर से दायर की गई है। याचिका में लापता लोगों के कई मामलों के लंबे समय से लंबित रहने, सरकारी आंकड़ों की कमी और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय नहीं होने को लेकर चिंता जताई गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं और बच्चों का लापता होना केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह उनके संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

याचिका के अनुसार, अभिजीत पांडे ने जुलाई 2026 में सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन दायर कर इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों से जुड़ी जानकारी मांगी थी। उन्होंने 1 जनवरी 2021 से 30 जून 2026 तक के मामलों का विवरण मांगा था।

RTI आवेदन में जिले में दर्ज लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या, इनमें से कितने लोगों को तलाश किया गया, कितने लोगों को बरामद किया गया और कितने मामले अभी भी लंबित हैं, इसकी जानकारी मांगी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्राप्त जानकारी और उपलब्ध आंकड़ों से कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में लापता लोगों के मामले अब भी अनसुलझे हैं। इसके अलावा सरकारी स्तर पर उपलब्ध डेटा और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर होने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच प्रक्रिया में कई स्तरों पर कमियां हैं, जिसके कारण मामलों का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है।

याचिका में हाई कोर्ट से मांग की गई है कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को लापता महिलाओं और बच्चों की तलाश के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की भी मांग की गई है।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर देशभर में कानून व्यवस्था और जांच व्यवस्था पर लगातार चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लापता मामलों में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण होता है और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कई मामलों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी मांग की है कि लापता मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए विशेष व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि परिवारों को लंबे समय तक अपने प्रियजनों की तलाश में परेशान नहीं होना चाहिए।

गुरुवार को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभागों को अपना पक्ष रखना होगा।

अदालत के इस कदम के बाद उम्मीद है कि इंदौर जिले में लापता महिलाओं और बच्चों के मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा तेज होगी। पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों से जवाब मिलने के बाद कोर्ट आगे की दिशा तय करेगा।

फिलहाल इस मामले में सभी की नजर हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है। याचिका के माध्यम से उठाया गया मुद्दा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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