वेटनरी भर्ती घोटाला: KPSC के पूर्व अध्यक्ष समेत कई पर FIR

Update: 2026-07-27 04:56 GMT

कर्नाटक : लोक सेवा आयोग (KPSC) की ओर से पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग में वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। भर्ती में गड़बड़ी के आरोपों के बाद KPSC के निलंबित अध्यक्ष एस. शिवशंकरप्पा साहूकार, आयोग के पूर्व सदस्यों, अधिकारियों और 29 चयनित उम्मीदवारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

मामले में शिकायत वेटनरी ऑफिसर मंजूनाथ ने विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिनके संबंध प्रभावशाली लोगों से थे या जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर चयन हासिल किया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने एस. शिवशंकरप्पा साहूकार, KPSC के कुछ सदस्यों, अधिकारियों और चयनित उम्मीदवारों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और चयनित उम्मीदवारों की जानकारी की जांच कर रही है।

आरोप है कि जनवरी में आयोजित वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में करीब 29 उम्मीदवारों को कथित रूप से अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया। शिकायत में कहा गया है कि इन उम्मीदवारों में KPSC अध्यक्ष के एक रिश्तेदार का नाम भी शामिल है। आरोप लगाया गया है कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले बिचौलियों द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था, ताकि वे चयन प्रक्रिया में सफल हो सकें।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा की ओएमआर शीट में कथित बदलाव किए और गलत तरीकों का इस्तेमाल कर चयन हासिल किया। पुलिस अब इन आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं।

मामला सामने आने के बाद KPSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आयोग राज्य में विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी होती है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को गंभीर माना जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर सकती हैं। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के रिकॉर्ड, ओएमआर शीट, चयन सूची और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। जांच के दौरान यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

KPSC के निलंबित अध्यक्ष एस. शिवशंकरप्पा साहूकार के खिलाफ लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने की मांग उठ रही है।

इस मामले में शामिल 29 चयनित उम्मीदवारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उम्मीदवारों को वास्तव में किसी तरह का अनुचित लाभ मिला था या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की धोखाधड़ी या परीक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो उनके चयन पर भी असर पड़ सकता है।

सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से न केवल योग्य उम्मीदवारों का भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि सरकारी संस्थानों की छवि पर भी असर पड़ता है।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में कितनी अनियमितताएं हुईं और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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