बेंगलुरु। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के औचक निरीक्षण के बाद राज्य में बाल मजदूरी के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया। पुलिस टीमों ने प्रदेशभर में कुल 16,951 स्थानों की जांच और छापेमारी करते हुए 800 बाल मजदूरों को मुक्त कराया। इनमें सबसे अधिक 503 बच्चों को बेंगलुरु शहर से बचाया गया। कार्रवाई के दौरान व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक क्षेत्रों, कारखानों, दुकानों, गैरेज, निर्माण स्थलों, होटलों, पेट्रोल पंपों और मॉल समेत उन जगहों की जांच की गई जहां बच्चों से काम कराए जाने की आशंका थी।

बाल मजदूरी के खिलाफ यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यशवंतपुर स्थित एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमिटी यानी एपीएमसी परिसर का अचानक दौरा किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने वहां बच्चों को काम करते देखा। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली और बाल मजदूरी रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस और संबंधित विभागों ने राज्यव्यापी विशेष अभियान की तैयारी की। इसके तहत उन स्थानों की पहचान की गई जहां बच्चों से मजदूरी कराए जाने की संभावना अधिक थी। पुलिस टीमों ने अलग-अलग जिलों में एक साथ कार्रवाई करते हुए हजारों प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। अभियान में कुल 800 बच्चों को काम करते हुए पाया गया और उन्हें वहां से मुक्त कराया गया।

आंकड़ों के अनुसार इस अभियान में बेंगलुरु शहर से सबसे अधिक 503 बाल मजदूरों को बचाया गया। इसके अलावा विजयपुरा में 72, तुमकुरु में 33, कोप्पल में 27, कलबुर्गी में 22, बेल्लारी में 15 और मैसूर में 13 बच्चों को मुक्त कराया गया। अन्य स्थानों पर की गई कार्रवाई को मिलाकर बचाए गए बच्चों की कुल संख्या 800 पहुंच गई।

बेंगलुरु में शनिवार सुबह 10 बजे विशेष अभियान की शुरुआत हुई। इसकी अगुवाई शहर के सभी 11 पुलिस डिवीजन के पुलिस उपायुक्तों यानी डीसीपी ने की। उनके साथ सेंट्रल क्राइम ब्रांच के दो डीसीपी भी अभियान में शामिल रहे। अलग-अलग पुलिस टीमों को संभावित स्थानों की जांच करने और बाल मजदूरी मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

शहर में पुलिस की टीमों ने कुल 5,897 स्थानों का निरीक्षण किया। ये वे ठिकाने थे जहां बच्चों के काम करने की आशंका जताई गई थी। अभियान के दौरान पुलिस ने छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों, कारखानों, दुकानों और गैरेज की जांच की। निर्माण स्थलों, होटलों, पेट्रोल पंपों और मॉल में भी टीमें पहुंचीं और वहां काम करने वाले लोगों की उम्र तथा अन्य जानकारियों की पड़ताल की गई।

बेंगलुरु में मिले 503 बाल मजदूरों का आंकड़ा राज्य के दूसरे जिलों की तुलना में काफी अधिक रहा। यह संख्या बताती है कि बड़े शहर के अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में बच्चों से काम कराए जाने की समस्या गंभीर रूप में सामने आई है। व्यापक स्तर पर जांच के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की पहचान हो सकी।

राज्यभर में 16,951 स्थानों पर चलाया गया अभियान अपने दायरे के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने केवल किसी एक तरह के कारोबार को निशाना नहीं बनाया, बल्कि उन सभी संभावित क्षेत्रों को जांच के दायरे में रखा जहां बच्चों के काम करने की आशंका हो सकती थी। इनमें संगठित औद्योगिक इकाइयों से लेकर छोटी दुकानों और गैरेज तक शामिल थे।

अभियान में निर्माण स्थलों की भी जांच की गई। ऐसे स्थानों पर बड़ी संख्या में अस्थायी मजदूर काम करते हैं और उनके साथ बच्चों की मौजूदगी की संभावना को देखते हुए टीमों ने वहां काम करने वालों की उम्र की पड़ताल की। इसी तरह होटल, पेट्रोल पंप और मॉल जैसे प्रतिष्ठानों में भी जांच की गई।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का यशवंतपुर एपीएमसी परिसर में औचक दौरा इस पूरे अभियान का आधार बना। बच्चों को काम करते देखने के बाद उन्होंने अधिकारियों को केवल उसी परिसर तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने बल्कि अन्य संभावित ठिकानों पर भी जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस ने पूरे राज्य में अभियान चलाकर हजारों स्थानों की पड़ताल की।

यशवंतपुर एपीएमसी परिसर एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान बच्चों का काम करते मिलना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना। इस घटना के बाद अधिकारियों ने ऐसे स्थानों की सूची तैयार की जहां बाल मजदूरी की आशंका थी। फिर पुलिस के अलग-अलग दलों को जांच और छापेमारी के लिए भेजा गया।

विशेष अभियान में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सीधी भागीदारी भी देखने को मिली। बेंगलुरु के सभी 11 डिवीजनों के डीसीपी और सीसीबी के दो डीसीपी ने कार्रवाई की निगरानी की। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ बड़ी संख्या में टीमों को सक्रिय किया जा सका। शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई कार्रवाई के तहत पुलिस दलों ने निर्धारित स्थानों पर पहुंचकर जांच शुरू की।

राज्य के अन्य जिलों में भी अभियान का असर दिखाई दिया। विजयपुरा में 72 बच्चों को बचाया गया, जो बेंगलुरु के बाद सामने आई बड़ी संख्या है। तुमकुरु में 33 और कोप्पल में 27 बच्चों को मुक्त कराया गया। कलबुर्गी में 22, बेल्लारी में 15 और मैसूर में 13 बच्चे बाल मजदूरी करते मिले। शेष बच्चों को राज्य के अन्य हिस्सों में हुई कार्रवाई के दौरान बचाया गया।

अभियान में बच्चों को केवल बड़े कारखानों या औद्योगिक क्षेत्रों से ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के प्रतिष्ठानों से मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई बताती है कि बाल मजदूरी की समस्या कई तरह के कार्यस्थलों में मौजूद हो सकती है। इसलिए पुलिस टीमों ने छोटे प्रतिष्ठानों और असंगठित कार्यस्थलों को भी जांच में शामिल किया।

बचाए गए बच्चों के संबंध में संबंधित विभाग अब नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके साथ उन प्रतिष्ठानों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी जहां बच्चे काम करते पाए गए। बच्चों की उम्र, उनके कार्य की परिस्थितियां और उन्हें काम पर रखने से जुड़ी जानकारी जांच का अहम हिस्सा होगी।

मुख्यमंत्री के एक औचक निरीक्षण से शुरू हुई कार्रवाई ने राज्य में बाल मजदूरी की स्थिति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हजारों संभावित ठिकानों की जांच और 800 बच्चों को मुक्त कराना अभियान की व्यापकता को दर्शाता है। अधिकारियों के सामने अब बचाए गए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उन कारणों की पहचान करने की चुनौती है जिनकी वजह से बच्चे पढ़ाई और सामान्य बचपन से दूर होकर काम करने के लिए मजबूर हुए।

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