बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कुदलागी में ‘जन सेवा विभाग’ शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जनता की शिकायतों को मौके पर सुनना और उनका समाधान तलाशना है। इसके तहत ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिसमें लोगों को अपनी समस्याएं लेकर बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय सरकार और उसके प्रतिनिधि खुद उनके पास पहुंचेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों के लिए हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को तालुका स्तर पर जाकर लोगों की समस्याएं सुनना जरूरी होगा। पहले चरण में तालुका स्तर पर दौरे किए जाएंगे और इसके बाद मंत्रियों को होबली स्तर तक जाकर आम लोगों से संवाद करने के निर्देश दिए गए हैं। विधायकों को भी पंचायत स्तर पर जनता से मिलने और उनकी शिकायतों को सुनने की सलाह दी गई है।

लोगों के दरवाजे तक जाएगी सरकार

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य प्रशासन और आम लोगों के बीच की दूरी कम करना है। कई बार लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बावजूद उनकी शिकायत संबंधित अधिकारी तक नहीं पहुंच पाती।

इसी स्थिति को बदलने के लिए सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक तंत्र सीधे लोगों के बीच जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों से आमने-सामने बातचीत होने पर उनकी वास्तविक समस्याओं और भावनाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे प्रशासन के लिए समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाशना भी आसान होगा।

पहले और तीसरे शनिवार को तालुका जाएंगे मंत्री

नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को मंत्रियों को तालुका का दौरा करना होगा।

इस दौरान वे स्थानीय लोगों से मिलेंगे और उनकी शिकायतें सुनेंगे। जनता से प्राप्त समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि केवल जिला मुख्यालयों में बैठकर समस्याओं की समीक्षा करने के बजाय जनप्रतिनिधियों को जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति समझनी होगी।

होबली स्तर तक पहुंचेंगे मंत्री

तालुका स्तर पर पहले चरण का अभियान पूरा होने के बाद मंत्रियों को होबली स्तर तक जाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अपनी बात सीधे सरकार के प्रतिनिधियों के सामने रखने का मौका मिलेगा।

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी कई शिकायतें स्थानीय स्तर पर सामने आती हैं। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायत सुनने से समाधान की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

सरकार की कोशिश होगी कि शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी निगरानी भी की जाए।

पंचायत स्तर पर लोगों से मिलेंगे विधायक

मुख्यमंत्री ने विधायकों को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह दी है। मंत्रियों के तालुका और होबली स्तर के दौरों के साथ विधायकों को पंचायत स्तर पर लोगों से मिलने के लिए कहा गया है।

इस व्यवस्था से प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को गांवों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पंचायत स्तर पर मिलने वाली शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाकर कार्रवाई कराई जा सकती है।

इससे उन लोगों को भी अपनी समस्या रखने का अवसर मिलेगा जो जिला या तालुका मुख्यालय तक आसानी से नहीं पहुंच पाते।

हर समस्या का तुरंत समाधान संभव नहीं

मुख्यमंत्री ने नई पहल की घोषणा करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि जनता की हर समस्या का तत्काल समाधान हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुछ समस्याओं के समाधान में प्रशासनिक प्रक्रिया, बजट, कानूनी प्रावधान या अन्य औपचारिकताओं के कारण समय लग सकता है। लेकिन सरकार और जनप्रतिनिधियों के लोगों तक पहुंचने से उनकी परेशानी को सीधे समझने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक जब सरकार लोगों की समस्याओं और भावनाओं को सीधे समझती है तो उचित समाधान मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

जन सेवा विभाग बनेगा संवाद का माध्यम

कुदलागी में शुरू होने वाला ‘जन सेवा विभाग’ इस नई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके माध्यम से स्थानीय समस्याओं को सुनने और संबंधित विभागों तक पहुंचाने की प्रक्रिया विकसित की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाना है। यदि किसी समस्या का तत्काल समाधान संभव नहीं है तो उसके कारण और आगे की प्रक्रिया की जानकारी भी संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती है।

शिक्षक दिवस कार्यक्रमों में शामिल होंगे मंत्री

मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस कार्यक्रमों को लेकर भी मंत्रियों की जिम्मेदारी तय की है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री और प्राथमिक शिक्षा मंत्री सहित तीन मंत्रियों पर शिक्षक दिवस समारोह से जुड़ी विशेष जिम्मेदारियां हैं। इसलिए इन तीन मंत्रियों को अलग रखते हुए बाकी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में शिक्षक दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कहा गया है।

इस फैसले का उद्देश्य जिला स्तर पर आयोजित शिक्षक दिवस कार्यक्रमों में सरकार की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

जमीनी स्तर पर प्रशासन मजबूत करने की कोशिश

सरकार की इस पहल को जमीनी स्तर पर प्रशासन को अधिक सक्रिय बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। तालुका, होबली और पंचायत स्तर तक मंत्रियों एवं विधायकों की पहुंच होने से स्थानीय समस्याएं सीधे सरकार के सामने आ सकेंगी।

नई व्यवस्था कितनी प्रभावी होती है, यह उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। केवल दौरे और शिकायतें सुनने के बजाय शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और उसकी निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल सरकार ने मंत्रियों और विधायकों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने का स्पष्ट संदेश दिया है। ‘जन सेवा विभाग’ के जरिए सरकार अब प्रशासन को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।

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