GBA बनने के बाद भी बेंगलुरु में सफाई व्यवस्था चरमराई, 3000 कर्मचारियों की कमी का दावा
बेंगलुरु। ग्रेटर बैंगलोर अथॉरिटी (GBA) के गठन के बाद भी सिलिकॉन सिटी की सफाई व्यवस्था में बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा है। शहर में कचरा प्रबंधन और सफाई कार्यों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सफाई कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कई इलाकों में व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।
संबंधित संगठनों का दावा है कि बेंगलुरु में कम से कम 3,000 अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की जरूरत है। वहीं, हाल ही में बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा के औचक निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों की अनुपस्थिति सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
होरामावु वार्ड के निरीक्षण में खुली पोल
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने हाल ही में सुबह-सुबह होरामावु वार्ड का अचानक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इलाके में सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच की।
निरीक्षण के दौरान करीब 30 प्रतिशत सफाई कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति जरूरी है।
पांच नगर निगमों में 15 हजार कर्मचारी
ग्रेटर बैंगलोर पब्लिक वर्क्स एसोसिएशन (GBPA) और कर्नाटक राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार, वर्तमान में बेंगलुरु के पांच नगर निगम क्षेत्रों में करीब 15,000 सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इसके बावजूद शहर की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे कचरे को देखते हुए करीब 3,000 और कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है। संगठनों का कहना है कि पर्याप्त मानव संसाधन के बिना शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से संचालित करना मुश्किल है।
कर्मचारियों की कमी से बढ़ रही परेशानी
बेंगलुरु देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है। यहां आबादी और निर्माण गतिविधियों के बढ़ने के साथ कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में सफाई कर्मचारियों की कमी का सीधा असर सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और रिहायशी इलाकों की सफाई पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में समय पर कचरा उठाने और सफाई कार्यों में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
फर्जी हाजिरी और कर्मचारियों की संख्या पर सवाल
सफाई व्यवस्था को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ जगहों पर कर्मचारियों की संख्या अधिक दिखाकर और फर्जी हाजिरी दर्ज कर भुगतान किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की शिकायतों ने सफाई व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन अब इस बात की जांच कर सकता है कि वास्तविक रूप से कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं और रिकॉर्ड में कितने कर्मचारियों की मौजूदगी दिखाई जा रही है।
शिवकुमार भी उठा चुके हैं कचरा समस्या का मुद्दा
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उपमुख्यमंत्री रहते हुए बेंगलुरु की कचरा समस्या को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने शहर की कचरा समस्या को हल करने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कचरा माफिया के कारण इसमें बाधाएं आईं।
उनके इस बयान के बाद भी शहर में कचरा प्रबंधन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। अब GBA बनने के बाद उम्मीद थी कि व्यवस्था में सुधार आएगा, लेकिन सफाई कर्मचारियों की कमी और अन्य समस्याएं अभी भी सामने आ रही हैं।
GBA के सामने बड़ी चुनौती
ग्रेटर बैंगलोर अथॉरिटी के गठन का उद्देश्य शहर के प्रशासन और विकास कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करना है। इसमें सफाई व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
लेकिन कर्मचारियों की कमी, अनुपस्थिति और निगरानी से जुड़ी शिकायतें GBA के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। प्रशासन को अब सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग
सफाई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि शहर की जरूरतों को देखते हुए नई भर्तियां की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध होने पर ही सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
इसके अलावा कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली लागू करने की जरूरत भी बताई जा रही है।
आगे सुधार की उम्मीद
मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद प्रशासनिक स्तर पर सफाई व्यवस्था की समीक्षा तेज होने की संभावना है। अधिकारियों को कर्मचारियों की उपस्थिति, काम की गुणवत्ता और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
बेंगलुरु जैसे बड़े शहर के लिए स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि GBA और संबंधित विभाग सफाई कर्मचारियों की कमी और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।