छात्रों को गांव और खेती से जोड़ने की पहल, राज्य सरकार ने शुरू किया ‘ग्रामअनुभव’ कार्यक्रम
बेंगलुरु। शहरी इलाकों में पढ़ने वाले छात्रों को ग्रामीण जीवन, खेती-बाड़ी और गांवों की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। सरकार ने ‘ग्रामअनुभव’ (ग्रामीण अनुभव कार्यक्रम) नाम से एक विशेष योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत शहरों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों को गांवों में ले जाकर उन्हें ग्रामीण जीवन का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा।
इस योजना को हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पहले 100 दिनों’ के एजेंडे के तहत मंजूरी दी गई थी। इसके बाद स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने पूरे राज्य में इस कार्यक्रम को लागू करने की घोषणा की है।
शहरी और ग्रामीण जीवन के बीच दूरी कम करने का प्रयास
सरकार का कहना है कि आज के समय में शहरों में रहने वाले कई छात्र गांवों की जीवनशैली, कृषि कार्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे परिचित नहीं हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए ‘ग्रामअनुभव’ कार्यक्रम तैयार किया गया है।
इस योजना के माध्यम से छात्रों को केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देने के बजाय उन्हें गांवों में जाकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में ग्रामीण संस्कृति, परंपराओं और किसानों के योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
गांवों में जाकर सीखेंगे छात्र
‘ग्रामअनुभव’ के तहत शहरी क्षेत्रों के छात्रों को गांवों का दौरा कराया जाएगा। वहां वे किसानों के साथ समय बिताएंगे और खेती से जुड़ी गतिविधियों को करीब से समझेंगे।
छात्रों को फसल उत्पादन, कृषि तकनीक, पशुपालन, ग्रामीण जीवन शैली और गांवों में होने वाले सामाजिक कार्यों की जानकारी दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस अनुभव से छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि भोजन उत्पादन के पीछे किसानों की मेहनत और ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
कक्षा 8, 9 और 11 के छात्रों को मिलेगा अवसर
इस योजना के तहत जिला केंद्रों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले शहरी इलाकों के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के छात्रों को शामिल किया जाएगा।
विशेष रूप से कक्षा 8, 9 और 11 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को गांवों में ले जाकर ग्रामीण अनुभव कराया जाएगा।
छात्रों को गांवों में जाकर वहां के लोगों से बातचीत करने, उनकी दिनचर्या समझने और खेती से जुड़ी प्रक्रियाओं को देखने का मौका मिलेगा।
शिक्षा को बनाया जाएगा अनुभव आधारित
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि आधुनिक शिक्षा में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। छात्रों को वास्तविक जीवन से जोड़ना भी जरूरी है।
‘ग्रामअनुभव’ कार्यक्रम इसी सोच पर आधारित है, जिसमें छात्रों को कक्षा के बाहर सीखने का अवसर मिलेगा।
इससे छात्रों में व्यवहारिक समझ विकसित होगी और वे समाज के अलग-अलग वर्गों की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समझ बढ़ेगी
किसान देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन शहरी क्षेत्रों में रहने वाले कई छात्र खेती की वास्तविक प्रक्रिया से अनजान रहते हैं।
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को खेती की शुरुआत से लेकर फसल तैयार होने तक की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।
वे यह भी जान सकेंगे कि किसान किन चुनौतियों का सामना करते हैं और कृषि क्षेत्र में तकनीक का किस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सांस्कृतिक जुड़ाव को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि गांवों और शहरों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाना जरूरी है।
गांवों की परंपराएं, लोक संस्कृति और जीवन शैली छात्रों के लिए नया अनुभव साबित हो सकती हैं। इससे उनमें विविधता को समझने और सम्मान करने की भावना विकसित होगी।
स्कूलों को दिए जाएंगे दिशा-निर्देश
स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
स्कूलों को छात्रों के गांव भ्रमण, सुरक्षा व्यवस्था और सीखने से जुड़ी गतिविधियों की योजना तैयार करनी होगी।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अनुभव देने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों का सहयोग भी लिया जा सकता है।
छात्रों के व्यक्तित्व विकास में मददगार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे उनमें सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और व्यवहारिक ज्ञान बढ़ता है।
ग्रामीण अनुभव प्राप्त करने से छात्र समाज के विभिन्न पहलुओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और भविष्य में अधिक जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद मिलेगी।
‘ग्रामअनुभव’ कार्यक्रम के जरिए सरकार का प्रयास है कि शहरी छात्र गांवों की वास्तविकता से जुड़ें और ग्रामीण भारत की ताकत, चुनौतियों और संभावनाओं को करीब से समझें। यह पहल शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और समाज से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।