PM मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल, तेजस्वी सूर्या ने दिया जवाब

Update: 2026-06-21 11:06 GMT

Karnataka कर्नाटक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को 12 साल पूरे होने के बावजूद एक भी औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने को लेकर विपक्ष लगातार आलोचना करता रहा है। इस मुद्दे ने एक बार फिर तूल तब पकड़ा जब बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या से इस पर सवाल पूछा।

कार्यक्रम के दौरान छात्र ने सांसद से पूछा कि जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक किसी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा क्यों नहीं लिया है। छात्र ने यह भी सवाल उठाया कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया से सीधे संवाद कितना महत्वपूर्ण है और इस पर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को कैसे देखा जाना चाहिए।

छात्र के सवाल पर माहौल में चर्चा तेज हो गई और यह विषय कार्यक्रम का मुख्य बिंदु बन गया।

इस पर जवाब देते हुए बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से सांसद तेजस्वी सूर्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में संचार के तरीके बदल चुके हैं और सीधे जनता से संवाद करने के नए माध्यम विकसित हो गए हैं।

सूर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री अब सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक माध्यमों के जरिए सीधे लोगों से जुड़ते हैं, जिससे पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की भूमिका पहले जैसी नहीं रह गई है। उनके अनुसार, यह बदलाव तकनीक और संचार प्रणाली के विकास का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी कहा कि सीधे संवाद के इन नए तरीकों ने पारंपरिक मीडिया प्रारूपों की प्रासंगिकता को काफी हद तक बदल दिया है, क्योंकि अब नेता बिना किसी मध्यस्थ के सीधे जनता तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद छात्रों और प्रतिभागियों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा। कुछ लोगों ने इसे लोकतांत्रिक पारदर्शिता से जोड़कर देखा, जबकि अन्य ने आधुनिक संचार माध्यमों को अधिक प्रभावी बताया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल न होने को लेकर राजनीतिक बहस लंबे समय से जारी है और विपक्ष इसे पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाता रहा है।

कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर इस बहस को सामने लाता है कि बदलते समय में पारंपरिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की भूमिका क्या रह गई है और क्या डिजिटल संवाद उसके विकल्प के रूप में पर्याप्त माना जा सकता है।

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