बेंगलुरु। कावेरी बेसिन में लगातार हो रही भारी बारिश ने कर्नाटक सरकार को बड़ी राहत दी है। बारिश के कारण काबिनी जलाशय भर गया है और जलाशय से तमिलनाडु की ओर प्राकृतिक रूप से अधिक पानी का बहाव शुरू हो गया है। इससे कर्नाटक को कावेरी जल बंटवारे से जुड़े निर्देशों का पालन करने में आसानी हो रही है।
पिछले 24 घंटों में कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों में पानी की आवक में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलाशयों में बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य सरकार के लिए कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों को लागू करना आसान हो गया है।
दरअसल, 28 जुलाई को CWRC ने कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलू जल मापन केंद्र पर 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करे। इस आदेश के तहत कुल मिलाकर करीब 4 टीएमसी फीट पानी छोड़ा जाना था।
कर्नाटक सरकार ने इस आदेश पर चिंता जताते हुए CWMA से अनुरोध किया था कि जल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आदेश को 15 दिनों के लिए टाल दिया जाए और जल विज्ञान संबंधी परिस्थितियों की दोबारा समीक्षा की जाए। हालांकि, 30 जुलाई को हुई बैठक में प्राधिकरण ने CWRC के निर्देश को बरकरार रखा।
अब कावेरी बेसिन में हुई भारी बारिश के बाद हालात बदल गए हैं। केरल के वायनाड और कर्नाटक के कोडगु समेत कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण KRS और काबिनी जलाशयों में पानी की आवक काफी बढ़ गई है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अगले दो-तीन दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इससे जलाशयों में पानी की स्थिति और बेहतर हो सकती है।
काबिनी जलाशय कावेरी नदी प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें पानी का स्तर बढ़ने से तमिलनाडु की ओर पानी का प्रवाह भी बढ़ जाता है। ऐसे में कर्नाटक को अलग से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने का दबाव कम महसूस हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि बारिश के कारण जलाशयों में बढ़ी आवक से राज्य को कावेरी जल प्रबंधन से जुड़े दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, सरकार अब भी जलस्तर और बारिश की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में CWRC और CWMA जैसे संस्थान जल वितरण और निगरानी की भूमिका निभाते हैं।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि जल उपलब्धता और मानसून की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही पानी छोड़ने का फैसला किया जाना चाहिए। राज्य पहले भी जलाशयों में कम पानी होने की स्थिति का हवाला देते हुए अतिरिक्त पानी छोड़ने को लेकर चिंता जताता रहा है।
वर्तमान स्थिति में भारी बारिश ने कर्नाटक को कुछ राहत जरूर दी है। काबिनी और KRS जलाशयों में बढ़ते जलस्तर से न केवल तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने की प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि राज्य में पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।
कृष्णराज सागर जलाशय मैसूर और आसपास के क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जबकि काबिनी जलाशय भी कावेरी नदी प्रणाली में अहम भूमिका निभाता है। दोनों जलाशयों में पानी की बढ़ती आवक से किसानों और आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल जल संसाधन विभाग स्थिति पर नजर रख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बारिश की मात्रा, जलाशयों में आवक और नदी के प्रवाह के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
कावेरी बेसिन में बारिश ने फिलहाल जल संकट और अंतरराज्यीय जल प्रबंधन से जुड़ी चुनौती को कुछ हद तक कम कर दिया है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति और जलाशयों के स्तर पर ही आगे की तस्वीर निर्भर करेगी।